Meena Day : 13.90 लाख बच्चों ने उठाई बालिकाओं के अधिकारों की आवाज

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  • प्रदेश के 1129 PM विद्यालयों में लगा ‘मीना मेला’
  •  नवरात्र में बालिकाओं ने समाज में फैलाया सशक्तिकरण का संदेश
  • मीना दिवस पर बालिकाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति बढ़ाई जागरूकता
  • जब बालिकाएँ सशक्त होंगी, तभी समाज भी सशक्त बनेगा: महानिदेशक स्कूल शिक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को प्रोत्साहित करने के लिए चल रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान के पांचवें चरण के अंतर्गत बुधवार को प्रदेशभर में ‘मीना दिवस’ और ‘मीना मेले’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर 13.90 लाख बच्चे, 82,427 अध्यापक और 2,20,313 अभिभावकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

प्रदेश के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालय और केजीबीवी में आयोजित इस विशेष दिवस का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास, शिक्षा और समाज में समान भागीदारी की भावना को बढ़ावा देना है। बच्चों ने मीना के ‘बहादुर’ और ‘निडर’ चरित्र से प्रेरणा लेते हुए असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और अपने अधिकारों के प्रति संकल्प लिया। मीना दिवस और मीना मेले के माध्यम से बच्चों और समुदाय ने यह संदेश दिया कि हर लड़की को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान का अधिकार है। निडर और प्रेरणादायी फिल्म के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास और साहस बढ़ाया गया। सभी विद्यालयों में केक काटकर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उत्सव मनाया गया। बता दें कि मीना दिवस का आयोजन बालिकाओं की शिक्षा, उनके अधिकार और समाज में उनकी समान भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया गया। यूनिसेफ द्वारा तैयार की गई बहादुर और निडर पात्र ‘मीना’, बच्चों के बीच प्रेरणा का स्रोत बनी। मीना की कहानियाँ बच्चों को यह सिखाती हैं कि मेहनत और लगन से हर बच्चा अपने सपनों को पूरा कर सकता है, चाहे वह डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या पायलट बनना चाहे।

यह रहीं ‘मीना मेला’ और गतिविधियाँ

प्रदेश के 1129 विद्यालयों में PM से आच्छादित मीना मेले में बच्चों और समुदाय द्वारा 10 से अधिक स्टालों का निर्माण किया गया, जिनमें विज्ञान और गणित के खेल एवं ट्रिक, कबाड़ से जुगाड़ और क्रिएटिविटी स्टाल, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छता पर स्टाल, कानूनी जागरूकता और माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, पैनल चर्चा, पोस्टर, बाल-अखबार और कॉमिक बुक निर्माण और खेलकूद तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त, मेले में स्वास्थ्य और पोषण, सुरक्षा-संरक्षा, बाल विवाह, दहेज प्रथा, महिला शिक्षा और सशक्तिकरण जैसे सामाजिक मुद्दों पर आधारित नाटकों, गीतों, एकांकी और पपेट शो का आयोजन किया गया।

कोट : बेसिक शिक्षा विभाग ने मिशन शक्ति 5.0 के इस चरण में बालिकाओं के स्वावलंबन, शिक्षा और अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। मेरा मानना है कि जब बालिकाएँ सशक्त होंगी, तभी समाज भी सशक्त बनेगा।

  • मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश
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