एटा जेल में नई महिला अधीक्षक का आतंक! तानाशाह अधीक्षक के साथ काम करने को तैयार नहीं प्रभारी जेलर

  • जेलर के बाद जेलर के बाद प्रभारी जेलर ने लिखा डीजी जेल को पत्र
  • वसूली करने वाले खूंखार कैदियों का अभी तक नहीं हुआ जेल स्थानांतरण
  • मुख्यालय के आदेश को दर किनार कर किए स्वयं के आदेश से कराया कैदियों जेल स्थानांतरण

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एटा जेल की नई अधीक्षक के आतंक से अधिकारी और सुरक्षाकर्मी खासे परेशान है। इस तानाशाह और वसूली को लेकर चर्चित अधीक्षक के साथ अधिकारी काम करने को तैयार नहीं हैं। आलम यह है कि कैदियों के जेल स्थानांतरण को लेकर हुए टकराव के चलते जेलर को दबाव बनाकर हटवा दिया वहीं स्पष्टीकरण का मनमाफिक जवाब नहीं देने पर अधीक्षक से प्रताड़ित डिप्टी जेलर ने डीजी जेल को पत्र भेजकर जेल से अन्यत्र जेल पर स्थानांतरित कराए जाने की मांग तक कर डाली। मातहत अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाली अधीक्षक के रवैए से जेल कर्मचारियों में दहशत और डर का माहौल बना हुआ है। अधिकारी और कर्मचारी इतने सहमे हुए हैं कि वह इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। दिलचस्प तो यह है कि विभागीय मंत्री और आला अफसरों को यह सच दिखाई ही नहीं पड़ रहा है।

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सूत्रों का कहना है कि बीते जून माह में एटा जेल का प्रभार संभालते ही नई जेल अधीक्षक आंकेक्षता श्रीवास्तव ने आतंक मचाना शुरू कर दिया। जेल में पूर्व से तैनात जेलर वीरेंद्र वर्मा ने जेल में बंदियों की गुटबाजी को देखते हुए कुछ सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी को इधर उधर कर दिया। इस बदलाव से अधीक्षक नाराज हो गई और उन्होंने मातहतों को डरा धमकाकर जेलर के खिलाफ बयान कराकर उन्हें हटवा दिया। उन्हें लखनऊ की नारी बंदी निकेतन में संबद्ध (विशेष ड्यूटी) पर लगवा दिया। जेलर को हटवाने के बाद जेलर का प्रभार डिप्टी जेलर तेजपाल को सौंपा गया। प्रभारी जेलर भी प्रभार संभालने के चंद दिनों बाद ही अधीक्षक की तानाशाही और अभद्रतापूर्ण व्यवहार से अजिज आ गया। प्रभारी जेलर ने भी डीजी जेल को पत्र भेजकर जेल से आसपास की अन्यत्र किसी जेल पर स्थानांतरित किए जाने की मांग की है।

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महानिदेशक कारागार समेत अन्य आला अफसरों को भेजे गए पत्र में डिप्टी जेल तेजपाल ने कहा है कि 20 जुलाई 25 को अधीक्षक ने ऑफिस में बुलाया और कहा कि बैकडेट (08.07.25) में स्पष्टीकरण स्वीकार करो और मेरे अनुसार बनाकर जवाब दो। इस पर जब प्रभारी जेलर ने आपत्ति दर्ज की तो उन्होंने मुझे धमकाया और कहा कि मेरे अनुसार स्पष्टीकरण नहीं दिया तो इसका परिणाम बुरा होगा और तुम्हें अन्य किसी आरोप में फंसा दिया जाएगा। अधीक्षक ने मुझे 07.07.25 को सजायाफ्ता कैदियों के जेल स्थानांतरित किए जाने के मामले बैकडेट (08.07.25) को कार्यालय से पत्र डिस्पैच कराकर स्पष्टीकरण के लिए 22.07.25 को देते हुए बैकडेट में जवाब मांगा। जवाब देने जब मैं अधीक्षक कार्यालय गया तो उन्होंने कार्यालय में मौजूद एक अन्य डिप्टी जेलर के सामने मेरे साथ जमकर अभद्रता करते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। अधीक्षक के इस कृत से आहत दबाव में आए प्रभारी जेलर से 23.07.25 को मुख्यालय के निर्देशों को दर किनार कर स्वयं के आदेश पर जेल स्थानांतरित किए गए कैदियों की सूची पर हस्ताक्षर करा लिए। सूत्रों का कहना है कि इस सूची में उन कैदियों (नंबरदारों) को रोक लिया गया जो बंदियों से वसूली कर अधीक्षक तक पहुंचाते हैं। प्रताड़ित प्रभारी जेलर ने डीजी जेल से आग्रह किया कि उन्हें यहां से हटाकर आसपास की किसी भी अन्य जेल पर स्थानांतरित कर दिया जाए। उधर कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

डीजी जेल का आदेश एटा जेल अधीक्षक के ठेंगे पर

सात साल से अधिक के सजा काट रहे सिद्धदोष बंदियों को केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित किया जाए। बीते दिनों ऐसा एक महानिदेशक कारागार ने प्रदेश के समस्त जेलों को जारी किया। डीजी जेल का यह आदेश एटा जिला जेल की महिला अधीक्षक के लिए कोई मायने नहीं रखता है। ओवरक्राउडिंग की समस्या से जूझ रही एटा जेल में करीब 600 बंदियों को रखने की क्षमता है। वर्तमान समय में इस जेल करीब एक हजार बंदी है। इसमें सात वर्ष से अधिक की सजा के करीब 166 बंदी है। सूत्रों का कहना है कि जेल अधीक्षक ने डीजी जेल के आदेश को दर किनार करके सिर्फ आधा दर्जन से कुछ अधिक बंदियों का ही जेल स्थानांतरण किया। अधीक्षक ने यह स्थानांतरण क्रमवार न करके अपने वसूली करने वाले बंदियों को छोड़कर किया है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि इन बंदियों को मोटी रकम लेकर रोका गया है।

आगरा परिक्षेत्र DIG  के आदेश का हो पाएगा अनुपालन!

महानिदेशक कारागार पीसी मीणा के जारी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए 20 सितंबर 25 को आगरा जेल परिक्षेत्र के उप महानिरीक्षक ने परिक्षेत्र के समस्त अधीक्षकों को एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में 17 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में जेलों में सात साल से अधिक की सजा के सिद्धदोष बंदियों को केंद्रीय कारागार पर स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया है कि जेल में बंद 07 वर्ष से अधिक की सजा के सबसे पुराने कम से कम 30 बंदियों को चिन्हित कर रविवार 21.09.25 तक केंद्रीय कारागार स्थानांतरित किया जाए। स्थानांतरित बंदियों की सूची डीआईजी कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। एटा जेल में इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित हो पाएगा। यह तो आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें जरूर लगाई जा रही हैं।

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