महिलाओं की सुरक्षा को लेकर 365 दिनों में 365 योजनाएं: फिर भी नहीं थम रहीं वारदातें

  • यूपी भर की बात छोड़ दें,
  • लखनऊ में कई सनसनीखेज घटनाएं हुई और रोकने के नाम पर पुलिस हाथ मसलती रह गई

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। चार दिसंबर 2015- मड़ियांव क्षेत्र के IIM रोड पर करीब एक किलोमीटर के दायरे में तीन जगहों चार पैर व युवतियों के दो धड़ मिले। करिअर डेंटल कॉलेज से कुछ दूरी पर एक थैले में चार पैर फेंकें गए थे। यहां से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर दो धड़ अलग-अलग मिले। दोनों का सिर गायब था। इस डबल मर्डर के मामले में पुलिस ने शवों की शिनाख्त कराने व कातिलों की तलाश में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन आज तक न तो हत्यारे मिले और न ही शवों की पहचान हो सकी। इसी वर्ष ही बंथरा क्षेत्र में 20 वर्षीय ब्यूटी पार्लर संचालिका सोनी की बेरहमी से कत्ल कर दिया गया।

वर्ष 2014 : मोहनलालगंज क्षेत्र के बलसिंह खेड़ा गांव के पास प्राथमिक विद्यालय परिसर में दरिंदगी के बाद महिला की हत्या।

वर्ष 2015 :  जानकीपुरम क्षेत्र से लापता छात्रा की पुराने डीजीपी मुख्यालय के करीब नाले के पास गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई।

23 मार्च 2019 :  राजधानी के कृष्णानगर क्षेत्र के डॉ राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की पार्किंग के सामने बेंच पर एक लावारिस बैग में एक करीब 35 वर्षीय महिला की टुकड़ों में लाश मिली। हालांकि बैग में महिला के दोनों हाथ-पैर व सिर, लेकिन धड़ गायब था।

दो फरवरी 2015- वृन्दावन सेक्टर नौ में शहीद पथ के नीचे सर्विस लेन पर एक के कटे दो पैर, पुलिस ने छानबीन शुरू की तो करीब चार सौ मीटर दूर आवास विकास कार्यालय के पास नहर किनारे एक बोरे में युवती का धड़ मिला। इसकी पहचान अमीनाबाद निवासी लॉ की छात्रा गौरी के रूप में हुई थी और कातिल भी पकड़े गए थे, जिसमें पुलिस ने एक अनुज नाम के लड़के को जेल भेजा, लेकिन अदालत की फटकार के बाद अनुज 66 दिन बाद जेल से रिहा हुआ था। यह तो महज बानगी भर है और भी कई बहू बेटियां दरिंदों और हत्यारों का शिकार बन चुकी हैं।

महिला दिवस के 364 दिन पीछे मुड़कर देखने पर राजधानी लखनऊ में महिला सुरक्षा की जो तस्वीर उभरती है, वह काफी खौफनाक है। मोहनलालगंज, अमीनाबाद, हजरतगंज, कृष्णानगर व मड़ियांव तक महिलाओं की निर्मम हत्या की घटनाओं ने सभी को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद पुलिस के आलाधिकारियों ने महिलाओं एवं लड़कियों की सुरक्षा के लिए अनगिनत योजनाएं बनाई, लेकिन हत्यारों और दरिंदों के आगे घुटने टेक कर रह गई। नतीजतन आज़ भी बहू बेटियां कहीं न कहीं वहशियों और कातिलों का निशाना बन रही हैं। राजधानी लखनऊ पुलिस भले ही महिलाओं एवं लड़कियों की सुरक्षा को लेकर दावे कर रहे हों, लेकिन कड़वा सच यह है कि खबर में दर्शाई गई घटनाएं उनके दावों को साफ तौर पर झुठला रही हैं। पुलिस ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा की कवायद तो कई बार शुरू की, चंद दिनों बाद योजनाएं फाइलों में दबकर रह गई। यही वजह है कि उनके साथ एक के बाद एक हो रहीं घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बहू बेटियों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर लखनऊ पुलिस कमर कस कर मैदान में उतर चुकी है।

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