- व्यंग्य : विवाह संस्कार कठिन होता जारहा
- विवाह कटवा रहे हर युग में
- नौकरी न मिलना सबसे बड़ा कारण
- प्रतियोगी परीक्षाओं मे उम्र हो रहा हायल
- फिर भी तय शादी को काटने वाले हैं तत्पर
- सबसे बड़ा बैरी बना सोशल साईट
- शहर बेस्ड लड़की कर रहे लोग नापसंद
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी
सतयुग मे जब देवी पार्वती ने कठोर तप करके अपने प्रारब्ध को सौभाग्य मे बदलने मे सफलता पाली और शिव प्रकट होकर एवमस्तु का वरदान दे दिया तो पहले विवाह कटवा सप्तर्षि रहे। यद्यपि वे लड़के वालो के कहने पर प्रेम की परीक्षा लेने गए थे। पर तय शुदा शादी मे भांजी मारा कि नहीं। बोले क्या बौरहा पागल से शादी कर रही हो विष्णु से कर लो। उनका चाल चलन रहन सहन इनसे बढ़िया है। ढंग से कपड़ा लत्ता पहनते है धनवान है। उनका घर द्वार बैकुंठ लोक है। यह तो पार्वती जी के समान बिटिया थी मानी ही नहीं.. अन्यथा धन वैभव देख कर कौन नही फिसल जाता। एक बार तो देवर्षि नारद ने ही षडानन को भड़का दिया,जिससे वह आजीवन कुंआरे रह गए। वैसे ही अब विवाह की उम्र बीती जारही है,लोग नौकरी की आस मे प्रतियोगी परीक्षाओं मे उलझे हैं। इधर लड़के और लड़कियां तीस से चालीस साल तक कुंवारे रह जारहे हैं। पहले कहते थे भैया समय से विवाह हो जाय तो जिम्मेदारी से छुट्टी पायें। हमारे भारत मे तेरह साल के भीतर लड़की की और अट्ठारह तक लड़के की शादी कर दी जाती थी। सात सौ साल की गुलामी काल मे त़ो पैदा होने के बाद ही मां बाप चिंतित होजाते थे,किसी की बुरी नजर न पड़े इसलिए कम उम्र मे विवाह कर दिये जाते,अलबत्ता गौना पांच साल पर होता था।
आजादी के पूर्व पं मदन मोहन मालवीय जी की सभा मे शपथ दिलाई जाने लगी कि बेटे की उम्र 18 वर्ष की होने के पहले शादी न की जाय। किंतु बेटियो को न्युनतम 13 साल रखा गया था। फिर भी लोग लड़को के बीस बाईस और लड़कियों की उम्र 17-18 साल होने तक शादी कर देते थे। गत वर्षो मे शादी की उम्र लड़कों की 21ओर लड़कियों की 18साल सुनिश्चित की गई। नाबालिग होने पर दोनों की शादी कानूनन अनुचित मानी गई है। वैसे वर्तमान समय मे लड़कियां या लड़के नौकरी पाने के बाद ही शादी पसंद कर रहे। किंतु न तो आसानी से नौकरियां मिल रही हैं और न शादियां ही हो पारही है। ऊपर से सोशल साईट पर ब्वाय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड के फंडा ने कुहराम मचा रखा है। विवाह तय होने पर पहले सोशल साईट पर उसके साईट के फ्रेड तलाशे जाते हैं,उसकी ऐक्टिविटी रीड की जाती है। इंस्टा ग्राम और रील खंगाले जाते है। जब वह कही़ नही़ दिखाई देता तब मन को संतोष होता है। अभी हाल ही मे मैने अपने एक मित्र को एक पढ़ी लिखी लड़की का बायोडाठा भेजा तो लड़का जो 37साल का होचुका है और सर्विस मे है उसने इन्कार करते हुए कहा..दिल्ली बेस्ड लड़की पसंद नही़ है।
हम लोगों के समय पचास साल पहले हर गांव मे खबरी हुआ करते थे। वे गांव के हर किसी के घर आने जाने वालो की थाह लगा लेते थे। शादी तय होजाने पर वरदेखुआ से लड़के या लड़की की कमियां बताने से चूकते नही थे। उसे कहीं न कहीं घेर कर सूचनाओ से अवगत करा ही देते थे। जरुरत पड़ने पर उनके घर पर पहुंच कर भांजी मार आते थे। वह परम्परा आज भी पहले की तरह ही जारी है। अब तो ह्वाट्स अप करके आसानी से काम होजारहा है। जब से आर्टिफिसियल आया है खतरे और अधिक बढ़ गए हैं। इससे कुंवारे और कुंवारियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
