झापा क्षेत्र संख्या पांच में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और बालेन शाह के बीच कड़ा मुकाबला

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  • नेपाल में झापा बालेन शाह बन सकते हैं प्रधानमंत्री या कोई और?
  • खौफजदा हैं नेपाल की तीन पुरानी पार्टियां
  • राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी भी मजबूत स्थिति में
  • पांच को चुनाव,सात को गिनती और आठ या नौ मार्च तक नेपाल में नई सरकार का गठन

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

झापा चुनाव आगामी पांच मार्च को है। मतों की गिनती सात मार्च को है। आठ या नौ मार्च तक नेपाल में नई सरकार का गठन हो जाएगा, बालेन शाह को लेकर पुरानी राजनीतिक दलों की सांसें अटकी हुई है। इस बार के चुनाव में नेपाल को कैसी सरकार नसीब होती है, इसके कयास लगाए जाने लगे है। किसी एक दल की पूर्ण बहुमत की सरकार को लेकर सभी के मन में शंका है। भारत में नेपाल के राजदूत रहे नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीप कुमार उपाध्याय का साफ कहना है कि नेपाल के नसीब में किसी एक दल की स्थाई सरकार न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। नेपाल में लोकतंत्र बहाली के बाद से यह स्थिति बनी हुई है और यही कारण है कि नेपाल में लोकतंत्र को मजबूती नहीं मिल पा रही है। इस सबके बीच विकट परिस्थितियों में हो रहे इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के तीन बड़े चेहरों पर लोगों की निगाह टिकी हुई है। नंबर एक पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के बालेन शाह है। दूसरे पर नेपाली कांग्रेस के गगन थापा और तीसरे नंबर पर एमाले के केपी शर्मा ओली हैं। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी जिसे राजावादी माना जाता है वह भी इस चुनाव में मजबूत स्थिति में चुनाव में में है। राजेंद्र लिंगदेन के नेतृत्व में लड़े जा रहे इस पार्टी को यदि अपेक्षित सीट मिली तो अन्य सभी पार्टियों का खेल बिगाड़ सकता है।

चुनाव आगामी पांच मार्च को है। मतों की गिनती सात मार्च को है। आठ या नौ मार्च तक नेपाल में नई सरकार का गठन हो जाएगा, बालेन शाह को लेकर पुरानी राजनीतिक दलों की सांसे अटकी हुई हैं। सवाल उठता है कि यदि किसी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो किस पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनेगी और इसमें कौन-कौन दल शामिल हो सकते हैं? यदि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सत्ता में नहीं आ पाती तो उसकी भूमिका क्या होगी? जेन-जी आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार के नेतृत्व में हो रहे इस चुनाव में सुदन गुरूंग के साथ काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह भी रवि लामी छाने के साथ आ गए। सुदन गुरूंग जेन-जी आंदोलन के नायक के रूप में जाने जाते हैं, वहीं बालेन शाह की पहचान एक रैपर और इंजीनियर की है। उन्होंने निर्दल लड़कर काठमांडू नगर निगम के मेयर पद का चुनाव जीता था। बतौर मेयर उन्होंने अपने कार्यालय में ग्रेटर नेपाल का मानचित्र लगाकर राष्ट्रवादी नेता की छवि धारण करने की कोशिश की थी।

जेन-जी आंदोलन के बाद जब अंतरिम सरकार के गठन की नौबत आई तो जेन जी का एक धड़ा बालेन को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में था जो फलीभूत नहीं हो सका। अब जब बालेन शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में झापा क्षेत्र संख्या पांच से एमाले अध्यक्ष और पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, तो संभावित प्रधानमंत्री के रूप में उनकी चर्चा लाजिमी है। नेपाल के इस चुनाव का परिणाम वैश्विक स्तर पर भी खास है, क्योंकि पूर्व की परंपरावादी राजनीतिक दलों की हालत बहुत बेहतर नहीं है। पुरानी पार्टी में एक नेपाली कांग्रेस है, जिसके ठीक ठाक प्रदर्शन की उम्मीद है, लेकिन यह पार्टी भी अब नए नेतृत्व के अधीन है। भारी अंतर्विरोध के बीच वरिष्ठ नेता गगन झापा को नया अध्यक्ष चुना गया है। गगन झापा अपनी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का चेहरा हैं। नेपाली कांग्रेस के भी अकेले दम पर सत्ता में आने की संभावना नहीं है फिर भी इस पार्टी के नए अध्यक्ष के रुख को लेकर चर्चा होती रहती है। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि नेपाल भारत और चीन के मध्य स्थित है इसलिए इसे दोनों देशों से संतुलन बनाकर ही आगे बढ़ना होगा। गगन थापा के इस कथन को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सकारात्मक दृष्टि से देखा गया। भारत और चीन दोनों के लिए गगन थापा का बयान मायने रखता है, लेकिन शेर बहादुर देउबा अथवा कोइराला परिवार के बिना चुनाव मैदान में उत्तरी नेपाली कांग्रेस का प्रदर्शन इस चुनाव में कैसा होता है, यह देखना जरूरी होगा। 2022 के चुनाव में नेपाली कांग्रेस 89 सीटें जीत कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई थी।

आज जिन परिस्थितियों में यह चुनाव हो रहा है, उसे देख ऐसा नहीं लगता कि नेपाली कांग्रेस 2022 के चुनाव परिणाम को दोहरा पाएगी? और यदि ऐसा हो पाया तो निस्संदेह यह गगन थापा की बड़ी कामयाबी होगी और तब उनकी सरकार की संभावना बढ़ सकती है। नेपाल में मतदान होने सिर्फ 40 घंटे शेष है। ऐसे में जब सरकार गठन की बात चलती है, तो मध्य नेपाल अर्थात मैदान और पहाड़ के बीच के हिस्से में एमाले की चर्चा भी खूब हो रही है। एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली गठबंधन की ही सही चार बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। इस बार राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बालेन शाह से उनका मुकाबला बेहद कड़ा है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अंदरूनी सर्वे में यह सीट बालेन शाह जीत रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र के लोगों की मानें तो यह इतना आसान भी नहीं है। 2022 में एमाले को 78 सीटों पर जीत मिली थी। वह दूसरा सबसे बड़ा दल था। इसके बाद प्रचंड के नेतृत्व वाली माओवादी केंद्र था, जिसके 32 सदस्य चुने गए थे। 2022 के प्रतिनिधि सभा में रवि लामीछाने की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 20 सीटों के साथ तीसरे नंबर की बड़ी पार्टी थी और सरकार में हिस्सेदारी के तौर पर इस पार्टी को एक उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री का पद झापा था, इन दोनों पदों पर पार्टी अध्यक्ष रवि लामीछाने स्वयं काबिज थे। जहां तक प्रधानमंत्री पद का सवाल है, तो यह शेर बहादुर देउवा, ओली और प्रचंड के हिस्से में आता रहा। इस बार बेशक राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की धूम है, लेकिन प्रतिनिधि सभा के 165 और उच्च सदन के 110 यानी 275 सीटों में से बहुमत का आंकड़ा जुटा पाना किसी के लिए भी आसान नहीं जान पड़ता। फिर भी चाहे नेपाली कांग्रेस , एमाले, माओवादी केंद्र हों राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को लेकर खौफजदा तो हैं, इनमें इस बात को लेकर खौफ है कि खुदा न खास्ता राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सत्ता में आ गई तो उक्त तीनों पार्टियों के ढेर सारे बड़े नेताओं का जेल जाना तय है क्योंकि भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े मामले में उनके हाथ सने हुए हैं। बीच चुनाव खबर यह भी है कि इस खौफ से उबरने के लिए नेपाली कांग्रेस, एमाले और माओवादी केंद्र के अंदरखाने कुछ और ही खिचड़ी पक रही है, जिसका प्रकटीकरण चुनाव परिणाम के बाद ही संभव है।

 

 

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