ICU में डॉन : माफिया मुख्तार यकबयक बीमार, इलाज करा रही सरकार

  • सकते में डॉन, आफत में जान, बीमारी का कारण बना रमजान
  • NDA के कुनबे में शामिल है बेटा, कासगंज जेल में है कैद

बुंदेलखंड से देवेंद्रनाथ मिश्र की रिपोर्ट…

बांदा। माफिया डॉन मुख्तार अंसारी बांदा जेल में कई मुकदमों के तहत उम्र कैद की सजा काट रहा है, उसकी तबीयत बीती रात दो बजे अचानक बिगड़ गई। उसे आनन-फानन बांदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। प्रशासन ने पूरे अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया है। मुख्तार के भाई और सांसद अफजाल अंसारी को इसकी इत्तिला कर दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार लोग बांदा के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं मुख्तार का बेटा और मऊ सदर से सुहेलदेव पार्टी से विधायक अब्बास अंसारी कासगंज जेल में कैद है। तकनीकी रूप से सुभासपा विधायक अब्बास अब एनडीए खेमे में आ चुका है। इस सम्बन्ध में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर और उनकी पार्टी के किसी भी सदस्य ने मुंह नहीं खोला है और न ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से कोई बयान आया है।

मुख्तार अंसारी की बांदा जेल में देर रात हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई। बांदा जेल से उसे जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने देखकर उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने की सलाह दी। लेकिन हालात ज्यादा बिगड़ने पर उसे ICU में वेंटीलेटर पर रखा गया है। जेल विभाग ने रात में ही मुख्तार के घर वालों सूचना भेजने के लिए पुलिस को पत्र भेज दिया था। मुख्तार की स्थिति काफी नाजुक बताई जा रही है। अंसारी ने कोर्ट में लिखित बयान के जरिए आरोप लगाया था की उसको स्लो पॉयजन यानी धीमा जहर दिया जा रहा है और उसकी तबियत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। जेल प्रशासन ने इस आरोप का खण्डन किया था। अंसारी के वकीलों ने अनहोनी की आशंका व्यक्त की है। फिलहाल अंसारी का इलाज जारी है। डॉक्टरों ने अभी-अभी कहा है कि स्लो प्वाइजनिंग जैसी कोई बात नहीं है। रोजा रखने के कारण मुख्तार की तबीयत बिगड़ी है और जांच में पता चला है कि उनके पेट में इन्फेक्शन है।

यूरिनल इंफेक्शन के चलते बांदा मेडिकल कॉलेज में भर्ती मुख्तार ने बीते 19 मार्च को खुद आरोप लगाया था कि उसे जेल में ‘स्लो प्वाइजन’ (धीमा जहर) देकर मारने की कोशिश की जा रही है। इसकी खबर मुख्तार के परिजनों ने वकील के माध्यम से सम्बन्धित अदालत को भी कर दी है। इस आरोप में बांदा कारागार के जेलर और दो डिप्टी जेलर को कुछ दिनों पहले निलम्बित भी किया जा चुका है। बताते चलें कि मुख्तार पर कुल 65 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस रिकार्ड के अनुसार अंतरराज्यीय गिरोह चलाने वाला मुख्तार अब तक करीब 10 मुकदमों में कोर्ट से सजायाफ्ता है। उस पर गाजीपुर में 14 अक्टूबर 1997 को पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। उसके बाद उसके गिरोह पर मुकदमों की लम्बी फेहरिस्त लदती चली गई।

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बांदा जेल में भीगी बिल्ली की तरह दिन काट रहे मुख्तार की कहानी बहुत पुरानी है। एक वक्त था जब यूपी और बिहार में उसकी ‘सरकार’ थी। लोग मुख्तार के नाम से थर-थर कांपते थे। इसके आपराधिक मंसूबे का शिकार बनने के बावजूद कोई इसके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। जिसके कारण हर तरफ उसका बोलबाला होता था। एके-47 से लेकर सभी अत्याधुनिक हथियार उसकी गैंग में हुआ करते थे। गौरतलब है कि तब सरकारें माफिया की मदद से बना करती थीं। अपराध और राजनीति के गंदे गठजोड़ से इनके काले कारनामों को सफेद किया जाता था। लेकिन सात साल की योगी सरकार ने माफिया और गुंडों की हालत बद से बदतर कर दी है। कई जेल की सलाखों के पीछे अपना दम तोड़ चुके हैं। उन्हीं में एक है मुख्तार जो बांदा जेल में अपने गुनाहों की सजा काट रहा है। तभी तो उसने भरी अदालत जज से ऐसी मनुहार करता दिखा, जैसे राजधानी की सड़कों पर भिखमंगे अपना खाली पेट भरने के लिए भीख मांगते रहते हैं। वो गिड़गिड़ाया- ”मी लॉर्ड! मैं हद से ज्यादा बीमार हूं। मेरा ठीक से इलाज नहीं हो पा रहा है। मेरे उचित इलाज का आदेश कर दीजिए।‘’

तब अदालत में खड़े लोगों के जेहन में जरूर कौंधा होगा कि क्या ये वही मुख्तार है, जो खुली जीप में हथियार लहराते और अपनी मूंछों पर ताव देते हुए निकलता था। जिसके रौब से लोग खौफ खाते थे। वो जिसे, जब चाहता था, घर से उठवा लेता था। उसे किसी भी तरह अपनी बातें मानने के लिए मजबूर कर देता था। फिर तो मुख्तार ने वो सब किया, जो एक दुर्दांत माफिया करता है। हथियारों के बाद खाने-पीने का शौक रखने वाला मुख्तार जब गाजीपुर जेल में बंद था, तब उसने जेल के अंदर ही एक तालाब खुदवा दिया। उसमें अपनी पसंद की मछलियां पाली थीं।

कहा जाता है कि उसकी ‘फिश पार्टी’ में कई बड़े नेता और अफसर भी आते थे। पूर्व डीजीपी और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद बृजलाल बताते हैं कि गाजीपुर जेल मुख्तार अंसारी का घर हुआ करती थी। हर शाम जेल के अंदर दरबार लगता था। बड़े-बड़े अधिकारी उसके साथ बैडमिंटन खेलने आते थे। बताते चलें कि साल 2017 से पहले मुख्तार जिस भी जेल में रहा, उसे हमेशा फाइव स्टार सुविधाएं मिलती रहीं। बांदा से पहले वो साल 2019 से 2021 के बीच पंजाब के रोपड़ जेल में बंद था।

साल 2017 के आगाज यानी योगी के ‘सरकार’ बनने के बाद अब इस माफिया की मुख्तारी खत्म हो रही है। बांदा जेल में सजा काट रहे इस गैंगस्टर का सब कुछ खत्म होता नजर आ रहा है। अब लोगों के बीच उसका डर खत्म हो चुका है। तभी तो कुछ दिनों पहले बाराबंकी के MP-MLA कोर्ट में फर्जी एंबुलेंस कांड की सुनवाई के दौरान जब दारोगा सुरेंद्र सिंह गवाही देने तो उन्हें देखकर मुख्तार अंसारी पसीने से तर-बतर हो गया था और वह बार-बार पानी पीता रहा।

मुख्तार की बीवी है फरार, 75 हजार का ईनाम है करार

पूर्वांचल के खूंखान माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की बीवी अफसा अंसारी भी दो साल से फरार चल रही है। यूपी सरकार ने 75 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित किया है। लेकिन अभी वो पुलिस गिरफ्त से बाहर है। जबकि उसका बेटा अब्बास अंसारी मऊ सदर सीट से विधायक है। मऊ विधानसभा चुनाव के दौरान एक चुनावी सभा में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जेल में बंद अब्बास ने अपने भाषण में अधिकारियों से हिसाब-किताब कर लेने की धमकी दी थी। इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना गया था। लम्बे समय तक फरार रहने के बाद उसने सरेंडर कर दिया था,  अभी वो कासगंज जेल में हैं।

क्या होता है गैंगस्टर एक्ट

साल 1986 में गैंगस्टर एक्ट बना था। सरकार ने वर्ष 2016 में इसे संशोधित किया। इस एक्ट के अनुसार उस समय तक गवाहों के पक्षद्रोही होने या भय से गवाहों के अपनी गवाही से मुकर जाने के कारण अभियुक्त बरी हो जाते थे। गैंगस्टर का प्रावधान इसलिए लाया गया कि यदि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध कर सके कि गवाह अभियुक्त और उसके गैंग के भय से पक्षद्रोही हुआ है या अपनी गवाही से मुकर गया है तो भी अपराधी को सजा दी जा सके। मुख्तार कई गैंग बनाकर कई जिलों में हत्या, लूट व हत्या के प्रयास जैसी वारदातें कर चुका है और इस कारण इसी एक्ट के तहत उसे सजा सुनाई गई है।

मुख्तार अंसारी को इन मामलों में मिली है सजा

कांग्रेस के प्रदेश अजय राय के सगे भाई अवधेश राय की हत्या में उसे 10 साल की सजा हो चुकी है, जो तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। गौरतलब है कि मुख्तार गैंगस्टर एक्ट के अलग-अलग 10 मुकदमों में सजायाफ्ता है। अवधेश राय हत्याकांड में पांच जून 2023 को उसे उम्रकैद मुकर्रर हुई है। वहीं कृष्णानंद राय हत्याकांड और नंदकिशोर रूंगटा अपहरण में गैंगस्टर एक्ट तहत गाजीपुर के MP-MLA कोर्ट ने 29 अप्रैल 2023 को 10 वर्ष का सश्रम कारावास और पांच लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके पहले 15 दिसंबर 2022 को गाजीपुर के एमपी-एमएलए कचहरी ने वर्ष 1996 में गैंगस्टर एक्ट के एक मुकदमे में 10 साल के कारावास और पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं लखनऊ के हजरतगंज में दर्ज गैंगस्टर एक्ट में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 23 सितंबर 2022 को दो साल की कैद 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। 21 सितंबर 2022 को उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारी को काम से रोकने व धमकाने के मामले में सजा सुनाई है। बताते चलें कि लखनऊ के आलमबाग थाने में दर्ज केस की धारा 353 में दो साल की कैद व 10 हजार रुपये अर्थदंड उस पर लग चुका है। वहीं धारा 504 में दो साल की सजा व दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा वो पा चुका है। साथ ही धारा 506 में सात वर्ष की कैद व 25 हजार रुपये अर्थदंड भी अदालत उस पर लगा चुकी है।

 

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