कम्युनिस्ट तानाशाह किम के राज में जनाक्रोश उफना!

के. विक्रम राव


उत्तर कोरिया के बिगड़ैल कम्युनिस्ट तानाशाह 40-वर्षीय किम जोंग-उन ने गत दिनों (12 जून 2023) एक राजाज्ञा जारी करके अपने राष्ट्र में बढ़ती आत्महत्याओं को देशद्रोह करार दिया। कठोर दंडनीय अपराध माना। सर्वेक्षण के अनुसार गत वर्ष की संख्या में अब लगभग चालीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस ढाई करोड़ की जनसंख्या वाले समाजवादी अधिनायकतंत्र का एक छत्र शासक है यह 39-वर्षीय किम जोंग-उन जिनके दादा किम इल सुंग ने इस राज की 1949 में स्थापना की थी। वे रूसी तानाशाह जोसेफ स्तालिन के सहयोगी थे। पड़ोसी चीन के संस्थापक माओ जेडोंग के समकालीन भी। किम जोंग-उन ने अपने आदेश में निर्दिष्ट किया कि : “अगर पूरे उत्तर कोरिया में आत्महत्या का कोई भी मामला सामने आया तो अधिकारियों को इसका जिम्मेदार ठहराया जाएगा।” उत्तरी कोरिया के अधिकारी ने रेडियो फ्री एशिया से बात करते हुए इसकी जानकारी दी।

देश में आत्महत्या का कारण बढ़ती गरीबी और बेरोजगारी बताया गया है। (WHO) विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2019 की रपट के मुताबिक, उत्तरी कोरिया में हर एक लाख लोगों पर 8.2 अनुपात में आत्महत्यायें हुई। हालांकि, किम ने अब तक खुदकुशी का सरकारी डेटा जारी नहीं किया है। दक्षिण कोरिया की गुप्तचर एजेंसी ने बताया कि किम के देश में हिंसक अपराधों की वारदातें भी लगातार बढ़ रही हैं। रेडियो फ्री एशिया के मुताबिक, तानाशाह किम ने आत्महत्याओं के बढ़ते केस पर एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इसमें लोग देश और कम्युनिस्ट सामाजिक व्यवस्था की आलोचना करने वाले आत्महत्याओं के नोट के खुलासे से हैरान थे। उत्तर कोरिया के यह तानाशाह अपने बेतुके फैसलों के लिए जाने जाते हैं। कुछ महीने पहले इन्होंने बच्चों के हॉलीवुड मूवी या सीरीज देखने पर सजा को और कठोर कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर किसी बच्चे ने आदेश का पालन नहीं किया तो इसकी सजा उसके माता-पिता को भी मिलेगी। इससे पहले 6 दिसंबर को उत्तर कोरिया में हाईस्कूल में पढ़ने वाले दो बच्चों को सजा-ए-मौत दी गई थी। रेडियो “फ्री एशिया” की रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों छात्रों की उम्र 15-16 साल की थी। उन्हें सरेआम चौराहे पर भीड़ के सामने गोली मार दी गई क्योंकि किम जोंग-उन ने इन आत्महत्याओं को “समाजवाद के खिलाफ वैर-विरोध” बताया।

इस पूरे राष्ट्रीय संकट के दौर मे उत्तर कोरिया के सत्तातंत्र में एक युवा महिला के रोल में सक्षम नूतन नेता की भूमिका में उभर कर आई है। नाम है पैंतीस-वर्षीया किम यो जोंग जिसके अग्रज हैं किम जोंग, राष्ट्र के अधिनायक। अपने देश की आणविक शक्ति को कम आंकने पर आक्रोशित होकर इस महिला ने दक्षिण कोरिया की सरकार को “मूर्खों का शासन” बताया था। अमेरिकी पिट्ठू कहा। पार्टी पोलितब्यूरो की सदस्या होने के नाते किम यो के कथन और चेतावनियां बड़े गौर से सुनी जाती हैं। अपने से केवल दो वर्ष बड़े भाई के साथ राजकार्य में हाथ बटाने में किम यो को महारत हैं। नमूने में सादृश्य दिखता है इन किम भाई-बहन का भारत की राजनीति के एक युवा युगल से। आज इस कम्युनिस्ट सुल्तान किम जोंग-उन ने पूर्वी एशिया को आणविक विनाश की कगार पर ला दिया है। उसके गरूर के समक्ष महाबली अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस अपना नपुंसक आक्रोश मात्र व्यक्त कर पाए हैं। इस्लामी परमाणु बम के निर्माता अणुशास्त्री डॉ अब्दुल कादिर की शह से अणुशक्ति हथियाने वाले कम्युनिस्ट कोरिया की विस्तारवादी लिप्सा बढ़ी है। बम के बटन पर अपनी तर्जनी रखे हैं किम जोंग उन। मानो कोई उद्दंड बालक खिलौना पकड़े है। अगर दबा दिया तो ? भारत भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। युद्धोन्मादी किम जोंग-उन कह चुका है कि वे दक्षिण कोरिया को बम बरसा कर लपटों को सागर बना देंगे। अमेरिका को उन्होंने धमकी भी दी कि कोरिया प्रायद्वीप के उत्तरी भाग को वह इराक या लीबिया न समझे जो शीघ्र क्षतविक्षत हो गए। नतमस्तक हो गए थे।

जब उत्तर कोरिया ने 18 नवंबर, 2022 के दिन अमेरिका तक की दूरी पर बम फेंकने का विस्फोटक प्रयोग किया था तो कुमारी किम यो ने विश्व को सचेत कर दिया कि अब हर शत्रु देश उत्तरी कोरिया की मार की सीमा के समीप है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक में उत्तर कोरिया की उसके अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण को लेकर निंदा की थी। भारत ने परमाणु और मिसाइल प्रौद्योगिकियों के प्रसार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि इस क्षेत्र की शांति व सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति की बुलाई आपात बैठक में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने तब कहा भी था कि भारत उत्तर कोरिया द्वारा हाल ही में किए गए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण की निंदा करता है। उन्होंने कहा भी कि भारत उत्तर कोरिया से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के पूर्ण कार्यान्वयन का आह्वान करता है। हम उत्तर कोरिया से संबंधित परमाणु व मिसाइल प्रौद्योगिकियों के प्रसार पर गौर करने की बात को दोहराते हैं। परमाणु और मिसाइल प्रौद्योगिकियों का प्रसार चिंता का विषय है, क्योंकि उसका भारत सहित अन्य क्षेत्रों की शांति व सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पाकिस्तान भी शामिल है।

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