‘बेसिक के मणि’ जो कभी बनना चाहते थे IAS, लेकिन आज गरीब बच्चों के सपनों को दिला रहे हैं पहचान

यूट्यूब चैनल ‘बेसिक के मणि’ पर देते हैं निःशुल्क आनलाइन शिक्षा की सौगात


अजय पाठक


कुशीनगर ।  बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने सपनों को छोड़ कर दूसरों के सपनों को पूरा करने में अपना पूरा जीवन लगा देते हैं। इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में महराजगंज जिले के घुघली ब्लाक में बतौर सहायक अध्यापक के पद पर तैनात डाॅ धनञ्जय मणि त्रिपाठी। जो कभी IAS ऑफिसर बनना चाहते थे लेकिन जीवन की तमाम झंझावातों और विपरीत परिस्थितियों के कारण वो अपना यह सपना पूरा नहीं कर पाए।

लेकिन हार मानने की बजाय उन्होंने PHD  तक की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय में बतौर सहायक अध्यापक नौकरी की और इसके साथ ही वो गरीब बच्चों को नि-शुल्क आनलाइन शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। विद्यालय की ड्यूटी खत्म करने के बाद रोजाना बच्चों को आनलाइन नि:शुल्क IAS  बनने के लिए पढ़ाते हैं। अपने सपनों को छोड़ कर दूसरे के सपनों को सच करने में अपना जीवन लगाना डाॅ धनञ्जय मणि के लिए आसान नहीं था। तो आइए जानते हैं डाॅ धनञ्जय मणि के जीवन के प्रेरक सफर के बारे में।

सिर्फ IAS ही बनना चाहते थे डाॅ धनञ्जय मणि

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के मड़ार विन्दवलिया गांव के रहने वाले डाॅ धनञ्जय मणि बचपन से ही सिविल सर्विस में जाने का सपना देखते थे। वो IAS ऑफिसर बनकर देश के लिए कुछ विशेष करना चाहते थे। लेकिन अचानक आई तमाम विपरीत परिस्थितियों के कारण डाॅ धनञ्जय मणि का सिविल सर्विसेज में जाने का सपना पूरी नहीं हो पाया। लेकिन हार मानने की बजाय उन्होंने समाज के लिए कुछ करने की ठानी।

गरीब बच्चों को देते हैं निःशुल्क आनलाइन शिक्षा की सौगात

खुद एक आईएएस अफसर बनने की चाह रखने वाले डाॅ धनञ्जय मणि का यह सपना तो पूरा ना हो सका। लेकिन बाद में डाॅ धनञ्जय मणि को उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में महराजगंज जिले में शिक्षक की नौकरी मिली। बड़े पद पर पहुंचकर सेवा करने का उनका खुद का सपना भले पूरा ना हो सका हो लेकिन सुविधाओं के अभाव में नई पीढ़ी के सामने भी यह समस्या आए, यह डाॅ धनञ्जय मणि नहीं चाहते हैं। बस इसी के चलते उन्होंने ‘बेसिक के मणि’ नाम से यूट्यूब चैनल तथा फेसबुक पर बच्चों को आनलाइन फ्री शिक्षा शुरू कर एक पहल की।

जिसके चलते उन्होंने तो खूब शोहरत तो कमाई ही साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। उन्होंने खुद महसूस किया है कि कैसे पैसों की कमी के कारण गरीब बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पाती। वो नहीं चाहते कि उनकी तरह किसी और बच्चे का भी सपना अधूरा रह जाए इसलिए उन्होंने बच्चों को आनलाइन पढ़ाने का फैसला किया। जिसके लिए वो अपने विद्यालय की ड्यूटी खत्म करने के बाद घूमने-टहलने या टाइम पास करने की बजाय रोज बच्चों को निःशुल्क आनलाइन पढ़ाने का काम करते हैं। इस क्लास की पहचान आज ‘बेसिक के मणि’ के नाम से हो गई है।

बच्चों को देते हैं निःशुल्क आनलाईन शिक्षा

डाॅ धनञ्जय मणि ‘बेसिक के मणि’ के नाम से जो आनलाइन पढाते है वहां वो किसी भी बच्चे से कोई फीस नहीं लेते। डाॅ धनञ्जय मणि को प्यार से उनके आनलाइन दर्शक, बच्चे और उनके अभिभावक ‘बेसिक के मणि’ सर के नाम से पुकारते हैं। वो अपनी इस पाठशाला में बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते हैं। यहां बच्चों को गणित, साइंस समेत लगभग सभी विषयों की क्लास के अलावा मोटिवेशनल और मनोरंजन गतिविधियों के वीडियो भी मिलती है। इतना ही नहीं ‘बेसिक के मणि’ यूट्यूब चैनल पर नवोदय स्कूल में एडमिशन लेने की तैयारी करने वाले बच्चे भी निःशुल्क आनलाइन पढ़ते है। उनके पढ़ाने के अलग तरीके के कारण ही बच्चे उनकी ओर आकर्षित होते है और लगातार क्लास में आते हैं। डाॅ धनञ्जय मणि आज अपने इस काम से लाखों लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से सफलता की नई कहानी लिखी है।

हर बच्चे की कामयाबी यह महसूस कराती है कि मेरी ख्वाहिश पूरी हो गई : डाॅ धनञ्जय मणि

भले ही मेरा IAS  बनने का सपना नहीं पूरा हो पाया लेकिन मैं चाहता हूं कि मेरे पढ़ाए इन बच्चों में से हर कोई मेरा सपना पूरा करे। हमारे इस प्रयास से जब कोई भी बच्चा कामयाब होता है तो मैं यहीं महसूस करता हूं कि मेरी ख्वाहिश पूरी हो गई।

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