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Litreture

काँटा काँटे से निकाला जाता है,

आग इतनी लगी है यहाँ कि, इन्सान इन्सान से जलता है, पूजा तो भगवान की करता हूँ, क़त्ल सुंदर फूलों का होता है। जाता हूँ मंदिर में पुण्य कमाने, पर पाप करके ही तो आता हूँ, गुनाह की क्षमा प्रभु से माँगता हूँ, पर दूसरा गुनाह करके आता हूँ। जीवन एक नाटक बन गया है, […]

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कानूनी पेचीदगियों पर मुस्कुराते अपराधी

दिव्येन्दु राय स्वतन्त्र टिप्पणीकार भारत का संविधान विश्व का सबसे प्यारा एवं सुन्दर संविधान बताया जाता है लेकिन भारतीय दण्ड संहिता में इतनी पेचीदगियां हैं कि इसके चलते अपराधी अपरोक्ष रूप से लाभान्वित हो जाते हैं। वर्तमान समय में झारखंड सहित पूरे देश में दुमका की बेटी की मौत पर बवाल मचा हुआ है, देश […]

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