
Sant Kabir Nagar: उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के गोसाईपुर में चर्चित ब्रह्मानंद यादव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी दो महिलाओं को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने निशा यादव और शीला देवी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह की अदालत में दोनों महिलाओं की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की कथित भूमिका और घटना की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत दिए जाने का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिकाएं खारिज कर दीं।
आंखों में मिर्च डालने के बाद हमला करने का आरोप
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव के मुताबिक, अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, 22 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:50 बजे ब्रह्मानंद यादव अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से गिठिनी बाजार जा रहे थे। आरोप है कि जैसे ही वह आरोपी राकेश यादव के घर के पास पहुंचे, वहां पहले से मौजूद निशा यादव पत्नी दुर्गेश और शीला देवी पत्नी जनार्दन ने उनकी आंखों में पिसी हुई लाल मिर्च झोंक दी।

अभियोजन के अनुसार, आंखों में मिर्च पड़ने से ब्रह्मानंद यादव मोटरसाइकिल समेत सड़क पर गिर गए। इसके बाद अन्य सह-आरोपियों ने कथित तौर पर लाठी-डंडे, गंडासे और फरसे से उन पर हमला कर दिया। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद परिजन उन्हें पुलिस की 112 सेवा के वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर समेत शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कुल 11 चोटों का उल्लेख होने की बात सामने आई है।
चश्मदीद गवाहों और पेन ड्राइव के साक्ष्यों का हवाला
इस मामले में वादी रामाकान्त यादव की तहरीर के आधार पर खलीलाबाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपी महिलाओं की ओर से रंजिश के चलते झूठा फंसाए जाने की दलील दी गई। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि दोनों महिलाएं घरेलू हैं।
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वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने इन दलीलों का विरोध किया। अभियोजन पक्ष की ओर से चश्मदीद गवाहों और केस डायरी में उपलब्ध पेन ड्राइव के साक्ष्यों का हवाला देते हुए आरोपियों की कथित संलिप्तता की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया।
अदालत ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत याचिका?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की परिस्थितियों, आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध सामग्री पर विचार किया। इसके बाद न्यायालय ने निशा यादव और शीला देवी को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं।
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