
New Delhi: रूस और यूक्रेन के बीच करीब 56 महीने से जारी युद्ध के बीच नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र में स्थानीय मानवीय संघर्षविराम को लेकर सहमति बनने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह सीजफायर 27 अक्टूबर से शुरू होकर कई दिनों तक चल सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य रूसी नियंत्रण वाले ओलेश्की शहर में फंसे नागरिकों तक जरूरी सामान पहुंचाना और वहां से निकलने के इच्छुक लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। हालांकि, यह समझौता पूरे युद्ध को समाप्त करने वाला सीजफायर नहीं है।
मानवीय सहायता के लिए हुआ समझौता
यूक्रेन के वरिष्ठ वार्ताकार और मानवाधिकार लोकपाल दिमित्रो लुबिनेट्स के अनुसार, इस पहल के तहत स्थानीय स्तर पर संघर्ष रोकने और नागरिकों की मदद करने की व्यवस्था की गई है। यूक्रेनी, रूसी और अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों की सुरक्षित निकासी जैसे मुद्दे शामिल रहे।
दिमित्रो लुबिनेट्स
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने भी इस मानवीय पहल को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। बताया गया है कि ओलेश्की में नागरिकों की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, अभियान के संचालन से जुड़ी सभी जानकारियां सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
सीजफायर के तहत क्या-क्या होगा?
स्थानीय संघर्षविराम का उद्देश्य युद्ध प्रभावित नागरिकों को राहत देना है। इसके तहत मुख्य रूप से तीन काम किए जाने की योजना है।
- राहत सामग्री की आपूर्ति: जरूरतमंद लोगों तक भोजन, दवाइयां, स्वच्छता उत्पाद और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जाएगा।
- सुरक्षित निकासी: शहर छोड़ने के इच्छुक नागरिकों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
- मानवीय काफिलों की सुरक्षा: राहत सामग्री ले जाने वाले वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र में गोलीबारी रोकने की व्यवस्था की जाएगी।
यूक्रेनी पक्ष के मुताबिक, अभियान को लागू करना आसान नहीं होगा। रास्तों पर बारूदी सुरंगों का खतरा होने के कारण सुरक्षा संबंधी तैयारियां भी जरूरी हैं।
रूस ने भी युद्धविराम की पुष्टि की
रिपोर्टों के मुताबिक, रूस के जनरल स्टाफ प्रमुख वालेरी गेरासिमोव ने खेरसॉन क्षेत्र में मानवीय अभियान से जुड़े स्थानीय संघर्षविराम की पुष्टि की है। रूसी पक्ष ने राहत काफिलों की सुरक्षित आवाजाही और संबंधित इलाके में इंजीनियरिंग जांच किए जाने की बात कही है।
रूस की अधिकारी याना लांट्राटोवा ने भी नागरिकों तक भोजन, दवाइयां और दूसरी आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, ओलेश्की छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए निकासी की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, निकासी का पूरा कार्यक्रम और लोगों को किस दिशा में ले जाया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

ओलेश्की में क्यों गंभीर हैं हालात?
दक्षिणी यूक्रेन का ओलेश्की शहर लंबे समय से युद्ध के प्रभावों का सामना कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, यहां भोजन और चिकित्सा सामग्री की कमी है। बिजली, गर्मी और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। शहर से बाहर जाने वाले रास्तों पर बारूदी सुरंगों और सैन्य गतिविधियों का खतरा बना हुआ है।
ऐसे में स्थानीय संघर्षविराम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराना और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना इस अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

क्या अब खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध?
फिलहाल इस स्थानीय सीजफायर को व्यापक शांति समझौता मानना सही नहीं होगा। यह पहल एक सीमित क्षेत्र में मानवीय सहायता और नागरिकों की सुरक्षा पर केंद्रित है। रूस और यूक्रेन के बीच पूरे मोर्चे पर स्थायी युद्धविराम या युद्ध समाप्त करने को लेकर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
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