
H-1B Visa Controversy: अमेरिका में भारतीय पेशेवरों और H-1B वीजा धारकों को लेकर दिए गए बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से विदेशी कर्मचारियों और ‘इंडेंचर्ड लेबर’ यानी बंधुआ मजदूरी से जुड़ी शब्दावली के इस्तेमाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे अनुचित और अपमानजनक बताया।
भारत का कहना है कि ऐसी भाषा ऐतिहासिक और औपनिवेशिक दौर की पीड़ादायक यादें ताजा करती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास और नवाचार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में उनके काम और भूमिका को अपमानजनक शब्दों से जोड़ना उचित नहीं है। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि कुशल पेशेवरों की आवाजाही से भारत और अमेरिका, दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिलता है।
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भारत ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने नौ अक्टूबर को जारी बयान में अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM कार्यक्रम से जुड़े कदम की जानकारी होने की बात कही। भारत ने कहा कि प्रतिभाशाली लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के अवसर मिलने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होता है।
भारत ने अमेरिका के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां विभिन्न पीढ़ियों के प्रवासियों ने मेहनत, उद्यमशीलता और नवाचार के जरिए विकास में योगदान दिया है। मंत्रालय ने जेडी वेंस की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत से जुड़ी संवेदनशीलता को नजरअंदाज करता है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।
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आठ टेक कंपनियों के PERM कार्यक्रम पर कार्रवाई
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी प्रशासन विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया की जांच कर रहा है। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी श्रम विभाग ने आठ अक्टूबर को आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और IT कंपनियों के PERM कार्यक्रम से जुड़े मामलों में कार्रवाई की घोषणा की।
इन कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और कैपजेमिनी के नाम शामिल बताए गए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति में संभावित अनियमितताओं और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों पर पड़ने वाले असर की जांच की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सभी कंपनियों के खिलाफ आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता।

H-1B वीजा को लेकर क्या है विवाद?
जेडी वेंस ने अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों और H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर नियुक्त करने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकती हैं।
वहीं, भारतीय पेशेवर अमेरिकी तकनीकी और कारोबारी क्षेत्रों में लंबे समय से काम कर रहे हैं। भारत की आपत्ति का मुख्य आधार यही है कि विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े किसी भी विवाद पर चर्चा तथ्यों और उचित भाषा के साथ होनी चाहिए।
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