
भारत-US ट्रेड डील पर नया पेंच! निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना ‘बहुत मुश्किल’
India-US Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अब दोनों देशों के सामने समझौते को अंतिम रूप देने की राह आसान नहीं दिख रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई है, जहां आगे बढ़कर एक-दूसरे को ज्यादा रियायत देना या लेना बेहद मुश्किल हो सकता है। उन्होंने इस स्थिति को ‘प्लैटो’ यानी एक ठहराव वाले चरण के तौर पर बताया।
सीतारमण के मुताबिक, यह समझौता काफी कठिन और लंबे समय से चल रही बातचीत का नतीजा है। दोनों पक्षों ने अपने-अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए कई मुद्दों पर चर्चा की है। ऐसे में अब आगे की बातचीत में अतिरिक्त रियायतों को लेकर दोनों देशों के लिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर समझौते के लिए कोई गुंजाइश बचती है तो दोनों पक्ष उस पर आगे काम कर सकते हैं।
फरवरी 2025 से चल रही है बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी Bilateral Trade Agreement पर बातचीत फरवरी 2025 में शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वॉशिंगटन में मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। उस समय 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी सामने रखा गया था।
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इसके बाद दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में भी काम शुरू किया। फरवरी 2026 में इसके लिए एक फ्रेमवर्क का ऐलान किया गया था, लेकिन व्यापक ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी रखने की जरूरत बताई गई थी।
टैरिफ और मार्केट एक्सेस बने अहम मुद्दे
भारत-अमेरिका वार्ता में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है, जबकि भारत की ओर से व्यापार से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए करने पर जोर दिया जा रहा है।
सीतारमण ने टैरिफ के जरिए व्यापार घाटा कम करने की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों को बातचीत और आपसी लेन-देन के जरिए सुलझाना अधिक व्यावहारिक तरीका है। उन्होंने भारत-चीन व्यापार का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापार घाटे को केवल भारी शुल्क लगाकर खत्म नहीं किया जा सकता।
अभी अंतिम समझौता नहीं
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने भी हाल में संकेत दिया था कि ट्रेड डील फिलहाल तत्काल होने वाली नहीं है, हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। वहीं, भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सितंबर के अंत से अक्टूबर की शुरुआत तक अमेरिका का दौरा कर अंतरिम समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
ऐसे में निर्मला सीतारमण का ताजा बयान बताता है कि बातचीत बंद नहीं हुई है, लेकिन समझौते के अगले चरण तक पहुंचने के लिए दोनों देशों को बची हुई असहमतियों पर रास्ता निकालना होगा। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि भारत और अमेरिका अपने-अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए किस तरह अंतिम सहमति तक पहुंचते हैं।
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