UP Rajya Sabha: आठ उम्मीदवारों की सूची में BJP की सोशल इंजीनियरिंग

• दो ब्राह्मण, दो दलित, एक क्षत्रिय और एक कुर्मी समेत दो अन्य बिरादरी के लोग शामिल
• मशहूर वकील राधाकांत ओझा समेत इन नेताओं को मिला मौका
• पशुधन मंत्री धर्मपाल अब आंवला विधायक नहीं, बने राज्यसभा सांसद

नया लुक ब्यूरो

Lucknow:  उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश से आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता और इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा का नाम भी शामिल है।

भाजपा की ओर से जारी सूची के मुताबिक उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। पार्टी ने इन नामों के जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। पूरब से पश्चिम तक सभी इलाकों को पार्टी ने करीने से साधा है। भाजपा की इस सूची को केवल राज्यसभा के आठ नामों की घोषणा के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा।

इसमें OBC, दलित, महिला, ब्राह्मण, क्षेत्रीय और संगठनात्मक प्रतिनिधित्व का संतुलन दिखाई देता है। साथ ही पार्टी ने सरकार और संगठन में सक्रिय नेताओं के साथ-साथ न्यायिक, सामाजिक और जमीनी पृष्ठभूमि वाले चेहरों को भी अवसर दिया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राज्यसभा के लिए यह चयन भाजपा की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।

छह अक्टूबर तक दाखिल होगा नामांकन

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख छह अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच सात अक्टूबर को होगी, जबकि उम्मीदवार नौ अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे।

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मतदान 16 अक्टूबर को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक होगा। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना की जाएगी। उत्तर प्रदेश से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के अलावा भाजपा के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल और सीमा द्विवेदी का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

कौन हैं राधाकांत ओझा?

भाजपा की सूची में राधाकांत ओझा का नाम खास तौर पर चर्चा में है। ओझा का नाम प्रयागराज हाईकोर्ट के वरिष्ठ और प्रभावशाली अधिवक्ताओं में गिना जाता है। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। कानूनी क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और अधिवक्ता समाज में मजबूत पकड़ को देखते हुए भाजपा ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। राधाकांत ओझा पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा के बड़े भाई हैं।

उनका राजनीतिक परिचय किसी बड़े जनाधार वाले चुनावी नेता के बजाय एक वरिष्ठ अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी के रूप में रहा है। साल 2024 में फूलपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी भाजपा के संभावित उम्मीदवारों में राधाकांत ओझा का नाम सामने आया था, हालांकि उस समय पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। अब भाजपा ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर प्रयागराज और पूर्वांचल के साथ-साथ सामाजिक एवं जातीय समीकरणों को साधने का संदेश दिया है।

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राज्यसभा चुनाव में BJP का दांव: अनुभव, संगठन और सामाजिक समीकरणों का संतुलन सूची में जहां धर्मपाल सिंह जैसे अनुभवी विधायक और योगी सरकार में मंत्री रहे नेता शामिल हैं, वहीं राधाकांत ओझा के रूप में न्यायिक और अधिवक्ता समाज से एक मजबूत चेहरा सामने आया है। ओझा का इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर अनुभव उन्हें पार्टी की पारंपरिक राजनीतिक राजनीति से अलग एक विशिष्ट पहचान देता है।

प्रकाश पाल के जरिए भाजपा ने अपने OBC संगठन को प्रतिनिधित्व दिया है, जबकि विद्यासागर सोनकर का चयन दलित समाज और पूर्वांचल की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इसी तरह पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को जगह देकर पार्टी ने महिला प्रतिनिधित्व को भी मजबूती दी है। राम प्रताप सिंह चौहान का संगठन में लंबा अनुभव और वर्तमान में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी उन्हें पार्टी के मजबूत संगठनात्मक चेहरों में शामिल करती है।

वहीं गोपी कृष्ण पाण्डेय का नाम लंबे समय से संगठन में सक्रिय जमीनी कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति की ओर इशारा करता है। सबसे ज्यादा चर्चा श्रुति गंगवार के नाम को लेकर भी है। IIT से शिक्षा प्राप्त और बरेली क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी श्रुति गंगवार, वरिष्ठ भाजपा नेता संतोष गंगवार की पुत्री हैं। उनका चयन बरेली क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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