New Delhi: भारतीय वायु सेना (IAF) सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर की शुरुआत तक एक बड़े सैन्य अभ्यास की तैयारी कर रही है। इस अभ्यास के मद्देनजर वायु क्षेत्र के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित किया गया है। इसके लिए NOTAM यानी ‘नोटिस टू एयर मिशन्स’ जारी किया गया है। अभ्यास का निर्धारित क्षेत्र पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक होने के कारण इस घटनाक्रम पर खास नजर रखी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायु सेना का यह अभ्यास 21 सितंबर से सात अक्टूबर तक चलने वाला है। इस दौरान राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर के आसपास के हवाई क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां होने की संभावना है। इसके अलावा बीकानेर के NAL क्षेत्र के आसपास भी हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से आरक्षित किया गया है।
NOTAM विमानन क्षेत्र में जारी किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण सुरक्षा नोटिफिकेशन होता है। इसके जरिए पायलटों, एयरलाइंस और अन्य संबंधित एजेंसियों को किसी हवाई क्षेत्र में होने वाली अस्थायी गतिविधियों, प्रतिबंधों या बदलावों की जानकारी दी जाती है। सैन्य अभ्यास या हथियारों के परीक्षण के दौरान ऐसे नोटिफिकेशन जारी करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
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बताया जा रहा है कि आरक्षित हवाई क्षेत्र लगभग 40,000 फीट की ऊंचाई तक फैला हुआ है। निर्धारित क्षेत्रों में से एक हिस्सा पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 20 किलोमीटर की दूरी तक बताया जा रहा है। सीमा के नजदीक होने के कारण इस सैन्य गतिविधि को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने भी इस घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है और सीमा के आसपास निगरानी बढ़ाई है। हालांकि, सैन्य अभ्यास का उद्देश्य भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को परखना और युद्ध जैसी परिस्थितियों में विभिन्न प्रक्रियाओं का अभ्यास करना बताया जा रहा है।
तरंग शक्ति 2026 से भी जुड़ सकता है अभ्यास
इस अवधि का एक हिस्सा भारतीय वायु सेना के बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 2026 से भी जुड़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच जोधपुर में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इसमें मित्र देशों की वायु सेनाओं के शामिल होने की संभावना है।
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ऐसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों के दौरान अलग-अलग देशों की वायु सेनाएं संयुक्त ऑपरेशन, हवाई युद्ध की रणनीति, संचार व्यवस्था और आपसी तालमेल का अभ्यास करती हैं। इससे भाग लेने वाले देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
सीमा क्षेत्र में बढ़ सकती है हवाई गतिविधि
लगातार होने वाले इन सैन्य अभ्यासों के चलते राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में कई दिनों तक लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य विमानों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। भारतीय वायु सेना के लिए यह अभ्यास अपनी ऑपरेशनल तैयारियों, तैनाती क्षमता और आधुनिक लड़ाकू प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की समीक्षा करने का अवसर होगा।
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