एम्वे ने आयुर्वेद में विस्तार के साथ ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को दिया समर्थन

Jaipur

न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद के तहत नौ नए उत्पाद; दो साल में 100 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य

स्थानीय किसानों से सोर्सिंग से तमिलनाडु उत्पादन तक, ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

5,000 साल पुराने आयुर्वेद और 90 साल पुराने न्यूट्रिलाइट विज्ञान का मेल

यह कदम एम्वे इंडिया के उत्पादों की श्रृंखला बढ़ाने भर का नहीं है। यह भारत में आयुर्वेद से जुड़ी पूरी आर्थिक श्रृंखला को मजबूत करने का मौका है, जिसमें जड़ी-बूटियों की जिम्मेदार खरीद, स्थानीय खेती, मैन्युफैक्चरिंग, वैज्ञानिक शोध, इनोवेशन और रोजगार शामिल हैं। न्यूट्रिलाइट के 90 साल से अधिक के बॉटनिकल साइंस के अनुभव और भारत में एक दशक की विनिर्माण क्षमता के साथ कंपनी आयुर्वेद के सदियों पुराने ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परख रही है। वेलनेस की यह सोच भारत में, भारत के लिए तैयार हुई है और इसमें देश की पारंपरिक वेलनेस परंपरा को दुनिया तक ले जाने की क्षमता है।

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इस लॉन्च के मौके पर एम्वे इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री रजनीश चोपड़ा ने कहा, “भारत में पारंपरिक स्वास्थ्य और वेलनेस का पूरा परिदृश्य बदल रहा है। सरकार का जोर आयुष को मजबूत करने और आयुर्वेद को देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाने पर है। इससे देश के भीतर आयुर्वेद को मजबूत आधार मिला है और दुनिया में इसकी पहचान भी बढ़ी है। जैसे-जैसे भारत आयुर्वेद से जुड़े इनोवेशन और विनिर्माण में अपनी क्षमता बढ़ाएगा, यह बढ़ता इकोसिस्टम नए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है, भारत की क्षमताओं को मजबूत कर सकता है और पारंपरिक वेलनेस के वैश्विक केंद्र के रूप में देश को उभरने में मदद कर सकता है। यह दिशा एम्वे इंडिया के विकास के अगले चरण और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य, दोनों से मेल खाती है।

आयुर्वेद की अपार क्षमता पर भरोसा जताते हुए हमने अगले दो साल में न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद को 100 करोड़ रुपये का कारोबार बनाने का लक्ष्य रखा है। पोषण की गहरी विशेषज्ञता, न्यूट्रिलाइट के 90 साल से अधिक के बॉटनिकल साइंस और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ एम्वे इंडिया आयुर्वेद के लिए भारत के रणनीतिक रोडमैप में योगदान देने की खास स्थिति में है।”

उन्होंने आगे कहा, “आयुर्वेद अब लोगों की रोजमर्रा की सेहत का हिस्सा बन रहा है। लेकिन उपभोक्ता उसमें भी वही पारदर्शिता, वही एकसमान गुणवत्ता और वही वैज्ञानिक प्रमाण चाहते हैं, जिसकी उम्मीद वे आधुनिक वेलनेस उत्पादों से करते हैं। न्यूट्रिलाइट में हमारा मानना है कि भरोसा ही हर पेशकश की बुनियाद है। न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद के लिए ‘हर जड़ी-बूटी की अपनी कहानी है और हम उसकी सच्चाई सुनिश्चित करते हैं’, यह सिर्फ एक वादा नहीं है। यह उपभोक्ता तक पहुंचने वाली हर जड़ी-बूटी की गुणवत्ता और ट्रेसेबिलिटी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है, ताकि लोग पूरे भरोसे के साथ आयुर्वेद अपना सकें।”

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पहले चरण में तीन आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन बाजार में आ रहे हैं। कालमेघ लिवर के बेहतर कामकाज में मदद करता है। शिग्रु (मोरिंगा) शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने और सूजन को कम करने में मदद करता है। वृक्षाम्ल (गार्सिनिया) मेटाबॉलिज्म बेहतर बनाने और पेट भरे रहने का अहसास बनाए रखने में मदद करता है।

उपभोक्ता अब इलाज से ज्यादा बचाव पर ध्यान दे रहे हैं। वे यह भी जानना चाहते हैं कि उत्पाद में इस्तेमाल हुई सामग्री कहां से आई है, कितनी असरदार है और कितनी प्रामाणिक। इस पूरी श्रृंखला के केंद्र में न्यूट्रिलाइट है, जो पिछले 90 साल से अधिक समय से प्रकृति और विज्ञान का बेहतरीन मेल लाता आया है। न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद में यही विरासत आयुर्वेद के परखे हुए ज्ञान से मिलती है और इस श्रेणी की उस बड़ी कमी को पूरा करती है, जो भरोसे, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर है।

यह पूरी श्रृंखला ऑर्गेनिक खेती करने वाले न्यूट्रीसर्ट प्रमाणित खेतों से जिम्मेदारी के साथ ली गई प्रामाणिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों पर टिकी है, जो टिकाऊ खेती और जिम्मेदार सोर्सिंग के प्रति न्यूट्रिलाइट की लंबी प्रतिबद्धता दिखाती है। हर फॉर्मूलेशन न्यूट्रिलाइट की आरएंडडी विशेषज्ञता और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है तथा कड़ी गुणवत्ता प्रक्रियाओं से गुजरता है।

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इनमें डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, एक्टिव इंग्रेडिएंट टेस्टिंग और सीड-टू-सप्लीमेंट ट्रेसेबिलिटी शामिल हैं, जो प्रामाणिकता, एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करती हैं। इसके अलावा दूषित तत्वों, भारी धातुओं, माइक्रोबायोलॉजिकल सुरक्षा और प्रमुख मार्कर कंपाउंड्स की एकरूपता की जांच कई चरणों में होती है। यह जांच बुनियादी नियामक जरूरतों से आगे जाकर वही गुणवत्ता, प्रामाणिकता और एकरूपता देती है, जिसकी उम्मीद उपभोक्ता न्यूट्रिलाइट से करते हैं।

इस श्रृंखला में आयुष पंजीकृत फॉर्मूलेशन भी शामिल हैं। इससे लागू नियामक ढांचे के मुताबिक उत्पाद तैयार करने की एम्वे इंडिया की प्रतिबद्धता मजबूत होती है और उपभोक्ता को अपनी पसंद की गुणवत्ता तथा प्रामाणिकता पर ज्यादा भरोसा मिलता है।

यह लॉन्च कंपनी की ओर से इसी श्रेणी में पहले पेश किए गए न्यूट्रिलाइट च्यवनप्राश के अनुभव पर आगे बढ़ता है। न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद की नींव इस सोच पर है कि सदियों पुराने आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन को उसी सटीक, विज्ञान आधारित तरीके से परखा जाए जो दशकों से न्यूट्रिलाइट की पहचान रहा है। कालमेघ 449 रुपये, शिग्रु 651 रुपये और वृक्षाम्ल 449 रुपये के एमआरपी पर 8 सितंबर 2026 से एम्वे के सभी अधिकृत चैनलों, एम्वे बिजनेस ओनर्स/डिस्ट्रीब्यूटर्स, एम्वे स्टोर्स और www.amway.in पर उपलब्ध होंगे।

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