
Ranchi: झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की है। राहुल गांधी के इस पत्र पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी के पत्र की भाषा को लेकर सवाल उठाए और इसे आपत्तिजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्र का लहजा ऐसा है, जैसे राहुल गांधी मुख्यमंत्री को सुझाव देने के बजाय निर्देश दे रहे हों।
छात्रों से मुलाकात की राहुल गांधी ने की अपील
राहुल गांधी ने अपने पत्र में छात्रों को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि मुश्किल दौर में उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से सीधे मुलाकात करने का आग्रह किया।
राहुल गांधी का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को सीधे सुनने से सरकार की ओर से उनके मुद्दों के समाधान को लेकर भरोसा मजबूत हो सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में उचित कदम उठाने की अपील भी की।
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BJP ने पत्र को बताया ‘ओवररीच’
राहुल गांधी के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया के जरिए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्र का अंदाज लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मुख्यमंत्री को सलाह देने के बजाय निर्देश देने जैसा प्रतीत होता है।
अमित मालवीय ने यह भी सवाल किया कि यदि राहुल गांधी को झारखंड के छात्रों की इतनी चिंता है तो वह खुद रांची जाकर प्रदर्शनकारी छात्रों से क्यों नहीं मिले। उन्होंने कहा कि दिल्ली से रांची की सीधी उड़ान उपलब्ध है और राहुल गांधी स्वयं छात्रों की बात सुनकर मुख्यमंत्री से बातचीत कर सकते थे। भाजपा नेता ने यह सवाल भी उठाया कि यदि छात्रों के मुद्दे को लेकर राहुल गांधी इतने गंभीर हैं तो उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को भी इसी तरह का पत्र क्यों नहीं लिखा।
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छात्रों की मांगों को लेकर भाजपा नेता ने भी उठाए सवाल
हालांकि, अमित मालवीय ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि भाजपा की आलोचना से हेमंत सोरेन सरकार की जवाबदेही खत्म नहीं होती। उनके मुताबिक, छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनकी शिकायतों पर सरकार को जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। इस तरह भाजपा की प्रतिक्रिया में एक ओर राहुल गांधी के पत्र के तरीके पर सवाल उठाए गए, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार से छात्रों के मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करने की अपेक्षा भी जताई गई।
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी साधा निशाना
अपने पत्र में राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन को व्यापक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए केंद्र की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था पर भाजपा और आरएसएस का प्रभाव बढ़ गया है और इससे छात्रों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को देश के भविष्य के रूप में देखा जाना चाहिए और उनकी समस्याओं को सुनना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने की कोशिश करने की अपील की।
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