
Rahul Gandhi on youth employment : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान देश के युवाओं से जुड़े रोजगार, शिक्षा और भविष्य के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। केपी ग्राउंड में आयोजित छात्र जनसभा में राहुल गांधी ने युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने और भारी फीस चुकाने के बाद भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं की मौजूदा स्थिति को ‘दर्द, डेटा और दौलत’ के तीन शब्दों के जरिए समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि देश के पास दुनिया की बड़ी युवा आबादी है, लेकिन इस युवा शक्ति का इस्तेमाल सही दिशा में नहीं हो पा रहा है।
रोजगार के अवसरों पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल
राहुल गांधी ने रोजगार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि देश में स्थायी रोजगार हासिल करने वाले युवाओं की संख्या बेहद कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार देने वाले प्रमुख क्षेत्रों के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
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उनके मुताबिक, नोटबंदी और GST के प्रभाव से छोटे कारोबार तथा रोजगार देने वाले कई पारंपरिक उद्योग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कपड़ा, चमड़ा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने की जरूरत है। राहुल गांधी ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पेपर लीक, भर्ती में देरी और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों को युवाओं की चिंता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवाओं के कई साल निकल जाते हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने से उनका भविष्य अनिश्चित हो जाता है।
सोशल मीडिया और AI के बढ़ते प्रभाव का जिक्र
राहुल गांधी ने युवाओं को सोशल मीडिया की बढ़ती लत को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने रील्स, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के अत्यधिक इस्तेमाल को युवाओं का समय और ध्यान भटकाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की ऊर्जा को केवल डिजिटल मनोरंजन तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, रोजगार और नए अवसरों की दिशा में लगाना जरूरी है।
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उन्होंने भविष्य की अर्थव्यवस्था में युवा क्षमता और डेटा की अहम भूमिका का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में युवा हैं और देश में डिजिटल डेटा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इस क्षमता और डेटा से पैदा होने वाले आर्थिक लाभ में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
छात्रों ने मंच पर रखीं अपनी समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग विश्वविद्यालयों और राज्यों से आए छात्रों को मंच पर अपनी समस्याएं रखने का मौका मिला। छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में देरी, शिक्षक नियुक्तियों, कथित पेपर लीक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और विश्वविद्यालयों की बढ़ती फीस जैसे मुद्दे उठाए। राहुल गांधी ने छात्र आंदोलनों का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में बदलाव के लिए डर के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से सवाल पूछना जरूरी है।
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