
गोरखपुर ही नहीं पहले भी कई बार पुलिस वाले लगा चुके हैं खाकी पर दाग
पुलिसकर्मियों ने महकमे के फरमान को किया नजरअंदाज, उठे सवाल
ए अहमद सौदागर
Tainted police personnel and crime : तीन दिनों पहले गोरखपुर जिले दस वर्षीय मासूम बच्ची का अपहरण कर पुलिस लाइन में तैनात सिपाही अभिषेक यादव ने उसके साथ दुष्कर्म कर मौत की नींद सुला दिया। इस सनसनीखेज मामले का राजफाश कर पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन कड़वा सच यह है यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई बार दागी पुलिसकर्मी वर्दी पर दाग लगाकर पुलिस विभाग को शर्मिन्दा कर चुके हैं।
पुलिस अफसर हर माह समीक्षा कर मातहतों को दिशा-निर्देश देते हुए फरमान जारी करते हैं कि अधीनस्थ अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन करें, लेकिन कुछ मातहतों को अपने अधिकारियों का फरमान शायद नहीं भा रहा है लिहाजा वह विभाग की किरकिरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। दस जून 2011- लखीमपुर-खीरी जिले के निघासन थाने में तैनात दागी पुलिसकर्मियों ने दुष्कर्म के बालिका की हत्या कर थाना परिसर में फांसी के फंदे पर लटका दिया था। पुलिस अफसरों की कार्रवाई में थानाध्यक्ष समेत 11 पुलिस कर्मी निलंबित हुए थे।
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वर्ष 2019- राजधानी लखनऊ का बहुचर्चित श्रवण साहू हत्याकांड में फर्जी मुकदमे में फंसाने के लिए चार बेगुनाह युवकों को शूटर बताकर सलाखों के पीछे भेज दिया था। इस मामले तत्कालीन SSP ने इस घिनौने कृत्य में संलिप्त दरोगा वीरेंद्र शुक्ला, अनिल सिंह व धीरेन्द्र यादव को बर्खास्त कर सलाखों के पीछे भेज दिया था।
11 जुलाई 2012- राजधानी लखनऊ के माल थाने तैनात दरोगा कामता प्रसाद ने पीड़ित महिला को उसकी फरियाद सुनने के बहाने बुलाकर उसकी अस्मत पर डाका डालने का प्रयास किया। वर्ष 2013- गाजीपुर थाने में तैनात तत्कालीन इंस्पेक्टर संजय राय अपनी प्रेमिका की चाहत में मासूम माज को शूटरों से गोली मरवा कर मौत के घाट उतरवा दिया।
नौ मार्च 2019- गोसाईगंज थाना क्षेत्र स्थित ओमेक्स अपार्टमेंट में रहने कोयला कारोबारी अंकित अग्रहरि के यहां कालेधन की सूचना बताते हुए पहुंचे पुलिसकर्मियों ने एक करोड़ 85 लाख रुपए की दिनदहाड़े डकैती डाल मौके से भाग निकले। इस मामले का राजफाश होने पर तत्कालीन SSP ने दरोगा आशीष तिवारी व पवन मिश्रा सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया। वर्ष 2018- मड़ियांव क्षेत्र में दीपावली से एक दिन पहले आगरा के सर्राफा कारोबारी आशीष जैन को वाहन चेकिंग के नाम पर लूटपाट कर धमकी देने का 18 पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया था।
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बीते कुछ साल पहले चेकिंग के नाम पर कहासुनी के बाद सिपाही प्रशांत चौधरी विवेक तिवारी नाम के शख्स के सीने में गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया।
इन सनसनीखेज मामलों को लोगबाग भुला भी नहीं पाए थे कि गोरखपुर जिले में तीन दिन पहले एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर दागी पुलिसकर्मी अभिषेक यादव हत्या कर शव को नदी में फेंक दिया।
यह तो महज बानगी भर है और भी कई दागी पुलिसकर्मी संगीन घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस महकमे को बदनाम कर चुके हैं। निलंबित के साथ-साथ बर्खास्त की कार्रवाई के बाद भी ये अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अपहरण, लूट, हत्या व दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध भी इनसे अछूते नहीं हैं। कायदे-कानून इनके लिए मायने नहीं रखते क्योंकि खाकी वर्दी पहनते हैं। गोरखपुर जिले में दुष्कर्म के बाद हत्या कांड से फिर साबित हो गया कि मुख्यमंत्री हों या डीजीपी पुलिसकर्मियों को किसी का खौफ नहीं है।
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One thought on “दागी पुलिसकर्मियों पर नकेल नहीं तो कैसे थमे अपराध”
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