तस्मै श्री गुरुवे नमः

Guru Purnima 2026

Guru Purnima 2026 : सर्वोच्च सत्ता प्रभु की ही मानी गयी है लेकिन प्रभु को पाने का मार्ग गुरु से ही मिलता है। यही कारण है कि गुरु को सर्वोच्च सत्ता से भी ऊपर अंगीकार किया गया है। आज गुरु पूर्णिमा है। समूचे विश्व में गुरुओं की श्रद्धावनत पूजा की जा रही है। सवाल यह है कि क्या एक दिन गुरु की पूजा करने से हमारे कर्तव्य की इतिश्री हो जाती है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा की। चढ़ावा चढ़ाया और समझ बैठे कि हम सबसे बड़े गुरुभक्त बन गये। गुरु का पूजन करना गुरुभक्ति नहीं है। सच्चा गुरुभक्ति तब साबित होगी जब हम अपने गुरु के बताये मार्ग पर चलें। आजकल अधिकांश लोग अध्यात्म का मार्ग बताने वाले गुरुओं को ही गुरु की संज्ञा से विभूषित करते हैं।

लोग यह भूल जाते हैं कि जीवन की पहली गुरु तो मां ही होती है जो हमें अंगुली पकड़कर चलना सिखाती है। दिनचर्या के सभी मार्ग दिखाती है। जब तक वह दुनिया में रहती है तब तक हमारी मुश्किलों के समाधान का रास्ता दिखाती रहती है। इसके बाद शिक्षक हमारे गुरु होते हैं, जो हमें विभिन्न विद्याओं में निपुण करते हैं। इसी निपुणता की ताकत पर हम जीवन जीने के लिए अर्थोपार्जन करने के योग्य बनते हैं। जीवन में कोई भी नयी कला सिखाने वाला व्यक्ति उस विधा में हमारा गुरु होता है।

यहां एक दृष्टांत देना समीचीन होगा। संत कबीर महा तपस्वी रामानंद को अपना गुरु बनाना चाहते थे लेकिन रामानंद उन्हें अपना शिष्य बनाने को तैयार नहीं थे। एक दिन वह दशाश्वमेघ घाट की सीढ़ियों पर लेटे थे, वहीं रामानंद जी गंगा स्नान कर रहे थे। भोर का समय था। रामानंद जी को कबीर दिखायी नहीं पड़े और अचानक उनका पैर कबीर के शरीर पर पड़ गये। उनके मुंह से अचानक निकला राम राम। बस कबीर ने इसी को गुरुमंत्र मान लिया और रामानंद जी को गुरु। आज सभी मानते हैं कि कबीर बड़े संत और समाज सुधारक थे। समाज सुधार के लिए उन्होंने जिन दोहों की रचना की वे मील के पत्थर हैं। यह अलग बात है कि ये दोहे सिर्फ पुस्तकों की धरोहर बनकर रह गये हैं। व्यवहार रूप में ये हमारे जीवन में नहीं समा पाये।

कहने का तात्पर्य यह कि जीवन में सफलता का गुरुमंत्र गुरु से ही मिलता है और जिसने इस गुरुमंत्र को अपने जीवन में साकार किया, उसने जीवन सफल कर लिया। एक गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का पूजन कर हम गुरुभक्ति नहीं पा सकते। जीवन का हर दिन गुरु पूर्णिमा होना चाहिए और हर दिन हमें अपने गुरु के बताये मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है। इसीलिये कहा गया कि गुरुर ब्रह्मा, गुरुर विष्णु गुरुर देव महेश्वरः। गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः।


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