
अब ‘परमाणु’ कारोबार में उतर रहा टाटा समूह
Tata Nuclear Project: टाटा समूह की कंपनी टाटा पावर ने मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में न्यूक्लियर प्लांट लगाने के लिए साइट स्टडी शुरू कर दी है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर सिन्हा ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि अगले छह महीनों में डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो जाएगी। साथ ही, प्राइवेट कंपनियों के लिए नए नियम नोटिफाई होने के 12 महीनों के अंदर टेक्नोलॉजी और प्रोजेक्ट का रोडमैप फाइनल कर लिया जाएगा। प्रवीर सिन्हा ने कहा कि कंपनी सरकारी कंपनी ‘न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ के रिएक्टर डिज़ाइन को प्राथमिकता दे रही है ताकि मंज़ूरी तेज़ी से मिल सके और लागत कम हो। कंपनी की योजना FY27 के आखिर में यूरोप और अमेरिका को अपने सोलर मॉड्यूल एक्सपोर्ट करने की भी है, जिसका लक्ष्य हर साल कम से कम 500 MW एक्सपोर्ट करना है।
प्रवीर सिन्हा ने बताया कि हम न्यूक्लियर नियमों का इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि इनसे ही टेक्नोलॉजी, फ्यूल, परमिट और मंज़ूरी की प्रक्रिया तय होगी। हमने खुद ही मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात समेत तीन राज्यों में काम शुरू कर दिया है। ज़मीन और मिट्टी से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की जा रही है और हमने जियो-टेक्निकल स्टडीज़ भी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले छह महीनों में, जब न्यूक्लियर नियम आ जाएंगे और उन पर स्पष्टता होगी, तब तक हम इनमें से कुछ काम पूरे कर चुके होंगे। साथ ही, हम अलग-अलग मंज़ूरी लेने और टेक्नो-इकोनॉमिक जानकारी जुटाने का काम भी शुरू कर सकते हैं।
12 महीने के अंदर लेंगे बड़ा फैसला NPCIL के पास 220 MW और 700 MW की यूनिट्स हैं। हम दोनों विकल्पों पर विचार कर रहे हैं—किसे तेज़ी से लागू किया जा सकता है, कौन ज़्यादा किफायती है और किसमें ईंधन का बेहतर इस्तेमाल होता है। हमें तकनीकी-आर्थिक आधार पर इसकी जांच करनी होगी। अगले 3-5 महीनों में नियम आ जाने चाहिए, और शायद अगले 12 महीनों में हम इस पर कोई फ़ैसला लेने की स्थिति में होंगे। इस समय, हमारे लिए NPCIL के डिज़ाइन को चुनना ज़्यादा सही है। हमें लगता है कि यह ज़्यादा किफायती होगा और इसे लागू करना भी तेज़ होगा, क्योंकि इन टेक्नोलॉजीज़ को भारत में ‘एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड’ से मंज़ूरी मिली हुई है।
टाटा समूह की न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ी एंट्री
भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में शामिल टाटा समूह अब परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर एनर्जी) के क्षेत्र में भी बड़ा कदम बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। समूह की ऊर्जा कंपनी टाटा पावर ने मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में संभावित न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने के लिए शुरुआती स्तर का काम शुरू कर दिया है। कंपनी इन राज्यों में जमीन और मिट्टी की जांच (जियो-टेक्निकल स्टडी) कर रही है, ताकि भविष्य में परियोजना के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जा सके। टाटा पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) प्रवीर सिन्हा के अनुसार, कंपनी को उम्मीद है कि अगले छह महीनों के भीतर इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली जाएगी। इसके साथ ही सरकार द्वारा निजी कंपनियों के लिए नए न्यूक्लियर नियम अधिसूचित होने के बाद अगले 12 महीनों के भीतर तकनीक और परियोजना के स्वरूप पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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कंपनी फिलहाल सरकारी उपक्रम न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के मौजूदा रिएक्टर डिज़ाइन को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है। टाटा पावर का मानना है कि पहले से स्वीकृत डिज़ाइन अपनाने से नियामकीय मंजूरियां जल्दी मिल सकती हैं और परियोजना की लागत भी कम रहेगी। साथ ही, इससे निर्माण प्रक्रिया में भी तेजी आने की संभावना है। प्रवीर सिन्हा ने बताया कि कंपनी सरकार की नई न्यूक्लियर नीति और नियमों का इंतजार कर रही है। इन्हीं नियमों के आधार पर तकनीक, ईंधन, सुरक्षा मानकों, परमिट और अन्य आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया तय होगी। हालांकि नियमों का इंतजार किए बिना कंपनी ने संभावित परियोजनाओं के लिए शुरुआती सर्वे और तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिए हैं, ताकि नियम लागू होते ही आगे की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
तीन राज्यों में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की तैयारी तेज
टाटा पावर वर्तमान में NPCIL की 220 मेगावाट और 700 मेगावाट क्षमता वाली रिएक्टर तकनीकों का अध्ययन कर रही है। कंपनी इस बात का आकलन कर रही है कि कौन-सी तकनीक लागत, निर्माण अवधि, ईंधन दक्षता और संचालन के लिहाज से अधिक उपयुक्त साबित होगी। तकनीकी और आर्थिक विश्लेषण पूरा होने के बाद ही अंतिम मॉडल का चयन किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यदि अगले तीन से पांच महीनों के भीतर नए नियम जारी हो जाते हैं, तो अगले एक वर्ष के भीतर न्यूक्लियर परियोजनाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। चूंकि NPCIL के डिज़ाइन को पहले ही एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) की मंजूरी मिल चुकी है, इसलिए शुरुआती चरण में उसी तकनीक को अपनाना सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है। न्यूक्लियर ऊर्जा के अलावा टाटा पावर अपने स्वच्छ ऊर्जा कारोबार का भी विस्तार कर रही है।
कंपनी की योजना वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक यूरोप और अमेरिका को सोलर मॉड्यूल का निर्यात शुरू करने की है। शुरुआती लक्ष्य हर वर्ष कम से कम 500 मेगावाट क्षमता के सोलर मॉड्यूल का निर्यात करना है। इससे कंपनी वैश्विक अक्षय ऊर्जा बाजार में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टाटा समूह की यह योजना सफल होती है, तो भारत में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिल सकती है। इससे देश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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