
Ram Mandir Trust : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की न्यासी मंडल की अहम बैठक बुधवार को अयोध्या में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में आगामी श्रावण मास की तैयारियों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सबसे बड़ा निर्णय यह रहा कि अब राम मंदिर के धार्मिक कार्यों का संचालन संतों के मार्गदर्शन में किया जाएगा। वहीं, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय फिलहाल एक महीने के लिए टाल दिया गया है।
श्रावण मास को लेकर तैयारियों पर जोर
बैठक में श्रावण मास के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने की संभावना को देखते हुए दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की गई। ट्रस्ट ने निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और मंदिर परिसर में सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की जाएं। प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए सचिव की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई।
CEO चयन प्रक्रिया को मिला अतिरिक्त समय
ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। चयन समिति ने सभी आवेदनों का सावधानीपूर्वक परीक्षण करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे न्यासी मंडल ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद अब CEO की नियुक्ति अगले महीने होने की संभावना है।
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चढ़ावा व्यवस्था और SBI की कार्यप्रणाली की समीक्षा
बैठक में मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। ट्रस्ट ने बताया कि कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। इसके अलावा चढ़ावा राशि की गणना को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ हुए समझौते (MOU) की समीक्षा की गई। न्यासी मंडल ने बैंक की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए वित्त समिति को भविष्य की व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की समीक्षा करने के निर्देश दिए।
धार्मिक समिति का पुनर्गठन
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला मंदिर की धार्मिक व्यवस्था से जुड़ा रहा। ट्रस्ट ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन करते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। समिति में कई प्रमुख संतों और महंतों को शामिल किया गया है, जो अब मंदिर की पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपराओं की निगरानी करेंगे। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर की सभी धार्मिक गतिविधियां अब संत समाज के निर्देशन में संचालित होंगी, जिससे मंदिर की परंपरागत शुद्धता और धार्मिक गरिमा बनी रहे।
दुष्प्रचार के बावजूद नहीं घटी श्रद्धालुओं की संख्या
बैठक में ट्रस्ट ने यह भी कहा कि विभिन्न प्रकार के दुष्प्रचार और आरोपों के बावजूद राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। ट्रस्ट ने इसे देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक बताया और सभी श्रद्धालुओं, संत समाज तथा अयोध्यावासियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही समाज और मीडिया के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने के लिए पहली बार ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने का भी निर्णय लिया गया। ट्रस्ट का मानना है कि इन फैसलों से राम मंदिर का प्रशासनिक और धार्मिक प्रबंधन पहले से अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगा।
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