
सुनवाई के लिए CJI ने बनायीं चार स्पेशल बेंच
CJI Surya Kant : न्यायालयों में बड़ी संख्या में विवाद लम्बित हैं। जितने केसों में फैसले नहीं होते, उससे ज्यादा केस दर्ज हो जाते हैं। कमोबेश पूरे देश के न्यायालयों में यह स्थिति है। कम से कम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया है और पुराने केसों को जल्द निपटाने के लिए सुनवाई को चार स्पेशल बेंच बनायी गयी हैं। फास्ट ट्रैक सुनवाई के बेंच बनाने का यह फैसला CJI सूर्यकांत ने लिया है। ये बेंच सुप्रीम कोर्ट के सबसे पुराने सिविल और क्रिमिल केसों की सुनवाई करेगी। जानकारी के मुताबिक पहले 800 मामलों को प्राथमिकता में रखा गया है। गर्मी में आंशिक अवकाश के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में फुल मोड में कार्यवाही शुरू हो गई है। ऐसे में सीजेआई सूर्यकांत का जोर है कि पुराने केसों को तेजी से निपटाया जाए ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि लोगों का न्याय व्यवस्था में भरोसा बना रहना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर बड़ा आरोप लगता है कि मामलों की सुनवाई और फैसला जल्दी नहीं होता है। कई बार लोगों को दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि कोई केस कितने समय से चल रहा है इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। सीजेआई ने कहा कि प्रयास यही है कि पुराने केसों को जल्दी निपटा लिया जाए जिससे लोगों को न्याय भी मिले और न्यायपालिका का बोझ भी कम हो।
कौन-कौन से जज बेंच में शामिल
CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पुराने केस लॉजिकल फैसले पर पहुंचाए जाएंगे। समय बीत जाने का मतलब यह नहीं कि न्याय नहीं होगा। नए रोस्टर के मुताबिक जस्टिस पीके मिश्रा और एसवीएन भट्टी की खंड पीठ पुराने सिविल केसों की सुनवाई करेगी। यह सुनवाई मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी। दो अन्य खंड पीठ पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगी। इनमें जस्टिस मनोज मिश्रा और उज्ज्वल भुयान शामिल हैं।
कितने केस लंबित हैं
मामले के जानकारों लोगों का कहना है कि हर पीठ को 200 केस सौंपे गए हैं। 800 पुराने मामलों का ट्रांसलेशन शुरू कर दिया गया है। नेशनल जूडिशनल डेटा ग्रिड (NJDG) के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में 95911 केस लंबित हैं जिनमें से 74,145 सिविल केस और 21,766 क्रिमिल केस हैं। इनमें से 37,826 केस यानी करीब 40 फीसदी केस एक साल ही पुराने हैं। इन तीन खंड पीठ से कहा गया है कि सप्ताह के तीन दिन पुराने मामलों की सुनवाई करें।
CJI ने रविवार को उत्तर प्रदेश की तर्ज़ पर पूरे हरियाणा में एकीकृत ज़िला अदालत परिसर बनाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि अधिक अदालतें होने से न्यायिक क्षमता बढ़ेगी, खासकर वाणिज्यिक विवादों और परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत आने वाले मामलों में। इस संबंध में जारी बयान के अनुसार, नए प्रतिष्ठान में 55 आधुनिक अदालत कक्ष हैं, जबकि पहले वाले में 45 थे। साथ ही, इस परिसर में वीडियो-कॉन्फ्रेंस और न्यायिक रिकॉर्ड रूम जैसी सुविधाएं भी हैं तथा उच्च न्यायालय की देखरेख में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र भी प्रस्तावित है।
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