शुक्र का सिंह राशि में गोचर: इन राशियों को कर देंगे मालामाल

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वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, सुंदरता, विलासिता और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। नवग्रहों में शुक्र का विशेष महत्व होता है और यह व्यक्ति के प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, कला, ऐश्वर्य और भौतिक सुखों को दर्शाता है। शुक्र देव की चाल, दशा और राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों के साथ-साथ पूरे संसार पर भी देखने को मिलता है। इसी क्रम में अब शुक्र अपनी स्थिति में परिवर्तन करते हुए सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं और इसका असर मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा।

आचार्य प्रदीप तिवारी
आचार्य प्रदीप तिवारी

लखनऊ। शुक्र आज यानी चार जुलाई को चंद्रमा की राशि कर्क से निकलकर सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर बेहद दिलचस्प माना जाता है, क्योंकि सूर्य को स्वभाव से उग्र और प्रभावशाली माना जाता है, जबकि शुक्र शीतल, सौम्य और सुख-सुविधाओं का कारक होता है। ऐसे में जब एक कोमल और ठंडे स्वभाव वाला ग्रह अग्नि तत्व की तेज राशि में प्रवेश करता है, तो यह मिश्रित या कमजोर परिणाम भी दे सकती है, खासकर प्रेम, रिश्तों और सुख-सुविधाओं से जुड़े क्षेत्रों में। शुक्र को प्रेम, आकर्षण और भौतिक सुख-सुविधाओं का प्रतीक माना जाता है। यह व्यक्ति के रिश्तों, आनंद, रचनात्मकता और जीवन में खुशियों को प्रभावित करता है। ग़ौरतलब है कि शुक्र लगभग 23 से 28 दिनों में राशि परिवर्तन करते हैं, इसलिए इनका हर गोचर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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इन-इन राशियों पर रहेगा शुक्र का शुभ प्रभाव

मेष राशि : शुक्र आपकी कुंडली में पहले तथा सातवें भाव के स्वामी होते हैं और यह आपके पंचम भाव में गोचर करेंगे। यहां पर शुक्र राहु, केतु के प्रभाव में तो रहेंगे ही रहेंगे। ऊपर से मंगल ग्रह की दृष्टि भी रहेगी। वैसे तो पंचम भाव में शुक्र के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है लेकिन राहु, केतु और मंगल के विशेष प्रभाव के चलते प्रेम संबंधों में कभी-कभी गर्मजोशी तो कभी-कभी तनाव भी देखने को मिल सकता है। क्योंकि मंगल आपके राशि स्वामी भी हैं, इसलिए ये आपका फेवर करेंगे और आर्थिक मामले में शुक्र आपको अच्छे परिणाम दे सकेंगे लेकिन दांपत्य संबंधी मामले में सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहेगी। संतान आदि से संबंधित मामलों में भी कुछ सावधानी की आवश्यकता रहने वाली है। विद्यार्थियों को भी मेहनत करने की स्थिति में अच्छे परिणाम मिल सकेंगे। स्वाभाविक है कि जब विद्यार्थी का ध्यान मनोरंजन पर अधिक होगा तो शिक्षा का ग्राफ़ गिर सकता है। ऐसे में फिलहाल मनोरंजन के विचार को त्याग कर अध्ययन पर फोकस करेंगे तो अच्छे परिणाम मिल सकेंगे। कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़ दिया जाए तो सामान्य तौर पर शुक्र का यह गोचर आपको अच्छे परिणाम देना चाह रहा है।

उपाय के रूप में मां दुर्गा को खीर का भोग लगाना शुभ रहेगा।

वृषभ राशि : शुक्र आपकी लग्न या राशि के स्वामी होते हैं। साथ ही साथ शुक्र आपके छठे भाव के भी स्वामी होते हैं। सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र आपके चौथे भाव में रहेंगे। यहां पर शुक्र राहु, केतु और मंगल के प्रभाव में रहेंगे। सामान्य तौर पर चौथे भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। हालांकि द्वादशेश मंगल के प्रभाव में होने के कारण अपने जन्म स्थान से दूर रहने वाले लोगों को शुक्र अच्छे परिणाम देंगे लेकिन बाकी लोगों को थोड़े तनाव भी दे सकते हैं। मंगल की दृष्टि इस बात का भी संकेत है कि वाहन इत्यादि सावधानी से चलाना समझदारी का काम होगा। यह गोचर आपको घर गृहस्थी का सुख देने का काम करेगा। क्योंकि राहु केतु का प्रभाव पहले से चतुर्थ भाव में बना हुआ है। आप घर गृहस्थी का बेहतर सुख ले सकेंगे। संबंधियों के साथ मिलना जुलना हो सकेगा।

सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने में भी शुक्र का यह गोचर आपकी सहायता करेगा। इन सबके बावजूद भी मंगल और राहु केतु का प्रभाव क्रोध को बढ़ाने का काम कर सकता है। अतः जब भी रिश्तेदारों से या किसी और से मिलें तो स्वयं को शांत रखते हुए मिलेंगे तो नकारात्मकता नियंत्रण में रहेगी। यह गोचर अपने लेवल पर आपको अच्छे परिणाम देना चाहेगा लेकिन अन्य कारणों से जो नकारात्मकता है, उसको शांत करने के लिए आपको प्रैक्टिकली भी कोशिश करनी पड़ेगी, तब जाकर आपको और भी अच्छे परिणाम मिल सकेंगे।

उपाय के रूप में माता या माता तुल्य स्त्रियों की सेवा करना शुभ रहेगा।

मिथुन राशि : शुक्र आपके लिए पंचम भाव के स्वामी होने के साथ-साथ द्वादश भाव के भी स्वामी होते हैं और यह आपके तीसरे भाव में गोचर करने वाले हैं। तीसरे भाव में शुक्र के गोचर को सामान्य तौर पर अनुकूल परिणाम देने वाला माना गया है। यहां पर मंगल ग्रह की दृष्टि भी कोई बड़ी नकारात्मकता नहीं देगी बल्कि आपके कॉन्फिडेंस को बढ़ाने का काम करेगी। केतु का गोचर भी आपको सपोर्ट देगा लेकिन एक साथ इन सभी ऊर्जाओं का मिलन आपके कॉन्फिडेंस के लेवल को काफी ज्यादा बूस्ट कर सकता है। यदि आप अपने आत्मविश्वास को संतुलित रखेंगे तो कई प्रतिस्पर्धात्मक मामलों में शुक्र का यह गोचर आपको अच्छा लाभ दिल सकेगा। क्योंकि तीसरे भाव में शुक्र के गोचर को मित्र का लाभ करवाने वाला कहा गया है। तो ऐसे में नए लोगों से मिलते समय आपके बर्ताव का संतुलित होना बहुत जरूरी रहेगा। जिससे सहजता से लोग आपके मित्र बन सकें। आपको अच्छे समाचार भी सुनने को मिल सकते हैं। भाई बंधु और पड़ोसियों के साथ आपके संबंध बेहतर होंगे। हालांकि इन सबके बावजूद भी राहु मंगल के प्रभाव के चलते ओवर कॉन्फिडेंट होने से बचने की सलाह एक बार हम आपको फिर से देना चाहेंगे। यदि किसी बात पर भाई बंधु या पड़ोसी जिद पर अड़े हों तो उस मामले को समझना और परिस्थित के अनुसार स्वयं को शांत कर लेना समझदारी का काम होगा।

उपाय के रूप में बहते हुए शुद्ध जल में साबुत चावल बहाना शुभ रहेगा।

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कर्क राशि : शुक्र आपके लिए लाभ भाव के स्वामी होने के साथ-साथ चतुर्थ भाव के भी स्वामी होते हैं और यह आपके दूसरे भाव में गोचर करने जा रहे हैं। क्योंकि दूसरे भाव में पहले से ही राहु केतु का प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है जो अनुकूल स्थिति नहीं है। ऐसे में दूसरे भाव में शुक्र का गोचर परिस्थितियों को बेहतर करने का काम करेगा। सारी की सारी परिस्थितियां संतुलित और सकारात्मक हो सकें यह जरूरी नहीं लेकिन हालात पहले से बेहतर होंगे। मंगल की दृष्टि को वैसे तो बहुत अच्छा नहीं माना जाता लेकिन आपकी कुंडली के लिए मंगल योग कारक ग्रह होता है; ऐसे में लाभ भाव में बैठा हुआ मंगल दूसरे भाव में जाने वाले शुक्र को देखकर उसकी एनर्जी को और बूस्ट करने का काम कर सकता है। ऐसे में शुक्र का यह गोचर आपको नए वस्त्र अथवा आभूषण आदि खरीदने के विचार दे सकता है। प्रयास करने पर यह खरीदारी संभव भी हो सकेगी।

आपकी रुचि, गीत, संगीत और साहित्य की ओर बढ़ सकती है। घर परिवार का माहौल तुलनात्मक रूप से बेहतर होगा। आप न केवल स्वयं बल्कि सपरिवार मनोरंजन का लाभ ले सकेंगे। घर परिवार या रिश्तेदारी में कोई मांगलिक कार्य भी हो सकता है। शासन प्रशासन से जुड़े हुए मामलों में भी आपको बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। घर गृहस्थी से संबंधित मामलों में भी अनुकूलता देखने को मिल सकती है। आप घर की साज सज्जा पर भी ध्यान दे सकते हैं।

उपाय के रूप में मां दुर्गा को देसी गाय के घी से बनी हुई मिठाइयां चढ़ाना शुभ रहेगा।

सिंह राशिः शुक्र आपकी कुंडली में कर्म स्थान के स्वामी होने के साथ-साथ पराक्रम स्थान के भी स्वामी होते हैं और इस गोचर की अवधि में शुक्र आपके पहले भाव में रहेंगे। पहले भाव में शुक्र के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। हालांकि शुक्र अपने लेवल पर आपको अच्छे परिणाम ही देना चाहेगा लेकिन अन्य ग्रहों के दुष्प्रभाव को रोकने में शायद शुक्र पूरी तरह से सक्षम नहीं रहेगा। क्योंकि आपके प्रथम भाव पर राहु केतु का प्रभाव पहले से ही है, उस नकारात्मकता को धुलने का काम शुक्र ग्रह करेगा और काफी हद तक अच्छे परिणाम दिलाने में सहायक भी बन सकेगा।

शुक्र का यह गोचर अनुभवी और वरिष्ठ लोगों के साथ आपके संबंधों को और बेहतर करने का काम कर सकता है। यात्राओं में भी यह गोचर सपोर्ट कर सकता है। तीसरे भाव का स्वामी होने के कारण यह कम दूरी की यात्राओं में अधिक मदद कर सकेगा अथवा व्यापारिक यात्राओं में आपकी यह पूरी मदद कर देगा। व्यापारिक यात्राएं फायदेमंद रह सकती है। हालांकि राहु केतु के प्रभाव को देखते हुए इस बात का ख्याल रखना है कि स्त्रियों और वरिष्ठों के साथ संबंध मर्यादित बने रहें। शिक्षा के दृष्टिकोण से इस गोचर को सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला माना जाएगा। प्रेम और विवाह से संबंधित मामलों में भी यह गोचर आपको अच्छे परिणाम देगा। आमोद प्रमोद से संबंधित मामलों में भी यह गोचर आपको अच्छे परिणाम देगा।

उपाय के रूप में काली गाय की सेवा करना शुभ रहेगा।

कन्या राशि : शुक्र आपकी कुंडली में भाग्य भाव के स्वामी होने के साथ-साथ दूसरे भाव के भी स्वामी होते हैं और सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र आपके द्वादश भाव में रहेंगे। वैसे तो शुक्र का द्वादश भाव में गोचर करना अच्छा माना गया है, क्योंकि यह भोगविलास की चीजों में बढ़ोतरी करवाने वाला माना गया है लेकिन केतु के साथ युति करने और राहु के प्रभाव में होने के कारण शुक्र अपनी अच्छाई पूर्ण रूप से देने में पीछे रह सकते हैं। ऊपर से अष्टमेश मंगल की दृष्टि भी शुक्र ग्रह पर रहेगी, इसलिए शुक्र के इस गोचर से हम मिले जुले परिणाम मिलने की उम्मीद कर सकते हैं। क्योंकि धन भाव का स्वामी द्वादश भाव में जा रहा है इसलिए कुछ खर्चे होने संभावित हैं।

दूर की यात्राओं के लिए इस गोचर को अच्छा माना जाएगा। विशेष कर विदेश यात्राओं के मामले में यह गोचर आपको अच्छा सपोर्ट कर सकता है लेकिन राहु, केतु और मंगल के प्रभाव को देखते हुए यात्राओं के दौरान सावधानी रखनी है। वहीं कम दूरी की यात्राओं विशेष कर जिसमें आप स्वयं ड्राइव करके जाते हैं; उसमें अपनी रक्षा सुरक्षा का पूरा ख्याल रखना भी जरूरी रहेगा। घर का कोई सदस्य भी दूर जा सकता है। कुल मिलाकर इस गोचर को खराब नहीं माना जाएगा लेकिन पूरी तरह से अच्छाई देने में भी यह पीछे रह सकता है। फिर भी परिणाम तुलनात्मक रूप से बेहतर रहेंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

उपाय के रूप में विवाहित होने की स्थिति में पत्नी को अन्यथा रिश्ते में भाभी लगने वाली किसी स्त्री को श्रृंगार सामग्री भेंट करना शुभ रहेगा।

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तुला राशिः शुक्र आपकी कुंडली में आपकी लग्न या राशि के स्वामी होने के साथ-साथ आठवें भाव के भी स्वामी होते हैं और सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र आपके लाभ भाव में रहेंगे। इस गोचर को सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है। अष्टम भाव में गोचर करने वाला मंगल छोटे-मोटे व्यवधान दे सकता है लेकिन धन भाव का स्वामी होने के नाते लाभ भाव में बैठे हुए ग्रह को आर्थिक मामले में मंगल का भी सपोर्ट मिलना जाएगा। प्रथम भाव के स्वामी का लाभ भाव में जाना विभिन्न प्रकार के लाभ मिलने का संकेत है।

कार्य व्यापार में भी आपको अच्छी अनुकूलता मिल सकती है। हालांकि सप्तमेश मंगल अष्टम में है लेकिन शुक्र की राशि में है और शुक्र लाभ भाव में पहुंचे हैं; इसलिए शुक्र अपने लेवल पर मंगल की कमजोरी को भी दूर करने का काम करेंगे। यानी आप दैनिक रोजगार में भी अच्छा कर सकेंगे। नौकरी में भी सामान्य तौर पर अनुकूलता बनी रहेगी। आर्थिक और पारिवारिक मामले के लिए भी इस गोचर को काफी अच्छा कहा जाएगा। धन और ऐश्वर्य में वृद्धि करवाने का काम भी शुक्र कर सकते हैं। शुक्र का यह गोचर आपको विभिन्न मामलों में सफलता दिलाने का काम करेगा। आप भाई बंधु और मित्रों का भी अच्छा सहयोग प्राप्त कर सकेंगे।

उपाय के रूप में नियमित रूप से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना सकारात्मकता को और बढ़ाने का काम करेगा।

वृश्चिक राशिः शुक्र आपकी कुंडली में सप्तम भाव के स्वामी होने के साथ-साथ द्वादश भाव के भी स्वामी होते हैं और सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र आपके दशम भाव में रहेंगे। दशम भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता। ऊपर से राहु केतु का प्रभाव भी रहेगा लेकिन अनुकूल बात यह है कि आपकी लग्न या राशि के स्वामी ग्रह मंगल, शुक्र को देखेंगे। इसलिए कुछ मामलों में आप अपने पुरुषार्थ से अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। इस गोचर को लड़ाई झगड़ा करवाने व वाला व्यवधान देने वाला कहा गया है। साथ ही साथ कामों में रुकावटें देने का काम भी, ऐसा शुक्र करता है। कुछ कामों में असफलता देने का काम शुक्र का यह गोचर कर सकता है, ऐसा गोचर शास्त्र में उल्लेख मिलता है। इसके अलावा शुक्र के इस गोचर को शासन प्रशासन से जुड़े मामलों में व्यवधान देने वाला भी कहा गया है। ऊपर से सप्तम भाव में गोचर कर रहा आपका लग्नेश या राशि का स्वामी मंगल भी शुक्र को देखेगा। भले ही कामों में व्यवधान रहे लेकिन आप अपने कार्य व्यापार में युक्ति पूर्वक काम लेकर सफलता भी प्राप्त कर सकेंगे। फिर भी कार्य व्यापार को लेकर कोई बड़ा रिस्क लेना ठीक नहीं रहेगा।नौकरी में प्रमोशन इत्यादि की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

उपाय के रूप में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करना हितकारी सिद्ध होगा।

धनु राशिः शुक्र आपकी कुंडली में छठे भाव के स्वामी होने के साथ-साथ लाभ भाव के भी स्वामी होते हैं और सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र आपके भाग्य भाव में रहने वाले हैं। भाग्य भाव में शुक्र के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है। ऊपर से लाभ भाव के स्वामी का भाग्य भाव में जाना इस बात का संकेत है कि लाभ करवाने में आपके भाग्य का भी अच्छा सहयोग मिल सकता है। यानी कि कर्म और भाग्य के संगम से आप अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। व्यापार व्यवसाय से संबंधित मामलों की बात की जाय तो उस मामले में शुक्र आपको मिले-जुले परिणाम दे सकते हैं लेकिन नौकरी के मामले में शुक्र आपको अच्छा सपोर्ट कर सकते हैं। विशेषकर ऐसे लोग जो जॉब में बदलाव करना चाह रहे हैं उनको बदलाव के मौके मिल सकते हैं और तुलनात्मक रूप से बेहतर तनख्वाह वाली नौकरी मिल सकेगी।

आर्थिक मामले के साथ-साथ पारिवारिक मामले में भी शुक्र का यह गोचर अच्छे परिणाम दे सकता है। द्वादश भाव के स्वामी मंगल की दृष्टि पड़ने के कारण विदेश से संबंधित मामलों में भी शुक्र आपको अच्छे परिणाम दे सकता है। कहने का मतलब यह है कि शुक्र का यह गोचर ज्यादातर मामलों में अच्छे परिणाम देना चाहेगा। दूर की यात्राएं फायदेमंद रहेगी लेकिन यात्राओं के दौरान सावधान रहना भी जरूरी रहेगा। क्योंकि राहु केतु और मंगल जैसे ग्रहों का प्रभाव शुक्र पर है अतः चोट खरोच का भय रहेगा। इसलिए सावधानी जरूरी रहेगी। शासन प्रशासन से जुड़े मामले में विनम्रता पूर्वक कार्य करके आप अच्छे परिणाम प्राप्त कर लेंगे। किसी मांगलिक कार्य में शामिल होने का मौका भी आपको मिल सकता है।

उपाय के रूप में सुगंधित जल से शिवजी का अभिषेक करना शुभ रहेगा।

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मकर राशिः शुक्र आपकी कुंडली में पांचवें भाव के स्वामी होने के साथ-साथ सप्तम भाव के भी स्वामी होते हैं और सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र आपके अष्टम भाव में रहेंगे। साथ ही साथ यह भी कहा गया है कि अष्टम भाव में शुक्र का गोचर कष्टों से छुटकारा दिलाता है, तो इस तरह से हम कह सकते हैं कि यदि कोई पुरानी परेशानी है, पुराना कष्ट आपके साथ कई महीनों से जुड़ा हुआ था तो शुक्र का यह गोचर उससे छुटकारा दिलाने का रास्ता खोज कर आपको दे सकता है। क्योंकि पांचवे भाव का स्वामी शुक्र आठवें भाव में पहुंचा है और उस पर राहु, केतु और मंगल का प्रभाव भी है। तो ऐसे में मर्यादित आचरण बहुत जरूरी रहेगा।

प्रेम संबंधों में मर्यादा का पूरा ख्याल रखना है। वासनात्मक विचारों को स्वयं पर प्रभावी नहीं होने देना है अन्यथा बदनामी का भय उत्पन्न हो सकता है। इसलिए मर्यादित रहे और अच्छे परिणाम प्राप्त करें। कर्म स्थान के स्वामी होकर शुक्र आठवें भाव में गए हुए हैं, ऐसे में कड़ी मेहनत के बाद अच्छे परिणाम प्राप्त होने की संभावनाएं मजबूत होंगी। इसलिए कामों के प्रति लापरवाह नहीं होना है बल्कि समर्पण के साथ काम करना है। क्योंकि ऐसा करने की स्थिति में आपको अच्छे परिणाम मिल सकेंगे।

उपाय के रूप में गाय को दूध और चावल खिलाना शुभ रहेगा।

कुंभ राशिः शुक्र आपकी कुंडली में चतुर्थ तथा भाग्य भाव के स्वामी होते हैं। सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र ग्रह आपके सप्तम भाव में रहेंगे। गोचर शास्त्र के नियम के अनुसार सप्तम भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता, ऊपर से राहु केतु की संगति भी रहेगी, इसके अलावा मंगल की चतुर्थ दृष्टि का प्रभाव भी रहेगा। इसलिए शुक्र के इस गोचर की अवधि में आपको शुक्र से संबंधित मामलों में सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहेगी। विशेषकर विवाहित लोग दांपत्य जीवन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। क्योंकि यह गोचर आपस में विवाद और नाराजगी उत्पन्न करने का काम कर सकता है।

घर गृहस्थी को लेकर की भी कुछ चिंताएं रह सकती हैं। विद्यार्थियों का मन विचलित रह सकता है। फलस्वरूप उनकी पढ़ाई का स्तर कमजोर हो सकता है। वहीं भाग्य का साथ न मिलने के कारण मेहनत का ग्राफ भी बढ़ सकता है। इसलिए आपको न केवल घर गृहस्थी पर पूरा ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी बल्कि दांपत्य जीवन पर भी समर्पण के साथ काम करने की आवश्यकता रहेगी। पिता और पिता तुल्य व्यक्तियों के मार्गदर्शन में काम करना तथा स्वयं को धर्म और आध्यात्म से जोड़ना बेहतर परिणाम दिलाने में सहायक बनेगा। यदि जननेन्द्रियों से संबंधित कोई तकलीफ हो तो इस गोचर की अवधि में उसे नजरअंदाज करने की बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर होगा।

उपाय के रूप में लाल गाय की सेवा करना हितकारी सिद्ध होगा।

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मीन राशिः शुक्र आपकी कुंडली में तीसरे तथा आठवें भाव के स्वामी होते हैं और सिंह राशि में गोचर करने की अवधि में शुक्र आपके छठे भाव में रहेंगे। छठे भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता। हालांकि वहां पर केतु का भी गोचर हो रहा है और केतु आपको अपने स्तर पर अच्छे परिणाम देना चाह रहा है। अतः शुक्र की नकारात्मकता को शांत करने में केतु आगे आ सकता है। इसके अलावा तीसरे भाव में गोचर करने वाला भाग्येश मंगल भी शुक्र को देख रहा है। यह भी शुक्र की नकारात्मकता को शांत करने का प्रयास करेगा। अपने स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखें और यदि आप विवाहित हैं तो जीवनसाथी या जीवन संगिनी के साथ अच्छे संबंध मेंटेन करने की कोशिश करें, उनकी भावनाओं की कदर करते रहें। ऐसा करने की स्थिति में कोई बड़ी परेशानी नहीं आएगी बल्कि कोई स्त्री ही आपकी ढाल बनने का काम करेगी। इसलिए विवादों से बचें, वाहन इत्यादि सावधानी से चलाएं। क्विक मनी बनाने वाली स्कीम्स से दूरी बनाना भी समझदारी का काम होगा।

उपाय के रूप में मां दुर्गा को लाल फूलों की माला पहनाना उपाय की तरह काम करेगा।

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