
RJD राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य अनवर अहमद का रविवार को पटना में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज पटना के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
लंबे समय से थे अस्वस्थ
जानकारी के अनुसार, अनवर अहमद पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। वह पटना के सब्जीबाग इलाके के निवासी थे और क्षेत्र में एक लोकप्रिय राजनीतिक एवं सामाजिक चेहरा माने जाते थे।
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जनता दल से शुरू किया था राजनीतिक सफर
अनवर अहमद ने 1990 के दशक में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और जनता दल से जुड़े। बाद में उनकी पहचान आरजेडी प्रमुख Lalu Prasad Yadav के करीबी सहयोगियों में होने लगी। उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठन में योगदान को देखते हुए उन्हें बिहार विधान परिषद का सदस्य भी बनाया गया था।
बिहार अवामी को-ऑपरेटिव बैंक के रहे चेयरमैन
राजनीतिक जीवन के अलावा अनवर अहमद ने सहकारिता क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह लंबे समय तक बिहार अवामी को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे और इस दौरान बैंक के विकास में योगदान दिया।
कैसे पड़ा ‘कबाब मंत्री’ नाम?
अनवर अहमद को राजनीति के गलियारों में ‘कबाब मंत्री’ के नाम से भी जाना जाता था। यह उपनाम उन्हें 1990 के दशक में मिला था, जब लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। बताया जाता है कि अनवर अहमद लालू यादव के लिए विशेष रूप से स्वादिष्ट मांसाहारी व्यंजन और कबाब का इंतजाम करते थे। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में लोग उन्हें मजाकिया अंदाज में ‘कबाब मंत्री’ कहकर पुकारने लगे थे।
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परिवार और समर्थकों में शोक
अनवर अहमद के बेटे असफर अहमद पटना के सब्जीबाग क्षेत्र से वार्ड पार्षद हैं। उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों, शुभचिंतकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
राजनीतिक जगत ने दी श्रद्धांजलि
अनवर अहमद को बिहार की राजनीति में एक मिलनसार और प्रभावशाली नेता के रूप में याद किया जाता है। उनके निधन से आरजेडी और बिहार की राजनीति को एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने हमेशा लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को उठाने का काम किया।
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