खामोश पहाड़, गहरी खाई और 120 लोग… दयारा बुग्याल में बबीता पांडे की तलाश बनी मिशन इम्पॉसिबल

missing trekker case India

missing trekker case India : उत्तराखंड का प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थल दयारा बुग्याल इन दिनों एक गंभीर और चिंताजनक घटना को लेकर सुर्खियों में है। नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली ट्रैकर बबीता पांडे 29 तारीख की रात बेस कैंप गोई से अचानक लापता हो गई थीं। कई दिनों से लगातार चल रहे खोज एवं बचाव अभियान के बावजूद अब तक उनका कोई भी ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू एजेंसियां लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में उनकी तलाश कर रही हैं, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

तीन अलग-अलग रूट पर 120 लोगों की बड़ी टीम तैनात

नौ  जून  को सर्च ऑपरेशन को और अधिक तेज और व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP, वन विभाग, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, आपदा प्रबंधन की QRT, स्वान दल, SOG, स्थानीय गाइड और ग्रामीणों सहित कुल 120 से अधिक लोगों की टीम बनाई गई है। इन सभी टीमों को तीन अलग-अलग दिशाओं और ट्रैकिंग रूट्स पर भेजा गया है ताकि पूरे दयारा बुग्याल क्षेत्र को गहराई से खंगाला जा सके। जंगल, खाई, पहाड़ी ढलानों और गदेरों में सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

ड्रोन और हेलीकॉप्टर से भी चल रहा सर्च ऑपरेशन

रेस्क्यू अभियान में आधुनिक तकनीक का भी पूरा उपयोग किया जा रहा है। तीन ड्रोन टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया गया है, जो लगातार ऊपर से निगरानी कर रही हैं और संभावित लोकेशन की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं। इसके अलावा रविवार को हेलीकॉप्टर की मदद से हवाई सर्च भी किया गया था, ताकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी संभावित संकेत को देखा जा सके। हालांकि अभी तक किसी प्रकार की सफलता नहीं मिल पाई है।

 जंगल, खाई और झाड़ियों में लगातार तलाशी अभियान

टीमें लगातार घने जंगलों, गहरी खाइयों, झाड़ियों और ट्रेकिंग मार्गों में सर्च कर रही हैं। मौसम और कठिन रास्तों के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सभी एजेंसियां पूरी मेहनत और समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोग भी अपनी ओर से मदद कर रहे हैं और क्षेत्र की जानकारी साझा कर रहे हैं।

भालुओं की आवाज को लेकर स्थानीय चर्चा

इस बीच स्थानीय ग्रामीणों के बीच एक नई चर्चा सामने आई है। कुछ लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में दयारा बुग्याल के जंगलों में दो भालुओं के संघर्ष जैसी तेज आवाजें सुनी गई थीं। कुछ जगहों पर खून जैसे निशान मिलने की भी बात कही जा रही है। हालांकि प्रशासन ने इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इसे केवल स्थानीय अनुमान माना जा रहा है। साथ ही इसे लापता ट्रैकर की घटना से सीधे जोड़ने से भी बचा जा रहा है।

आखिर बबीता पांडे कहां हैं?

सबसे बड़ा और गंभीर सवाल अभी भी यही है कि बबीता पांडे आखिर कहां गईं? क्या यह केवल एक ट्रैकिंग दुर्घटना है जिसमें वह रास्ता भटक गईं? या फिर वह किसी कठिन परिस्थिति में फंस गई हैं? या फिर इस घटना के पीछे कोई और अनजाना कारण है? फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब पहाड़ों की खामोशी में छिपे हैं। पूरा प्रशासन और रेस्क्यू टीम उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद में लगातार अभियान चला रही है।

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