टेक्सटाइल से इंजीनियरिंग तक असर! अमेरिका के प्रस्तावित टैरिफ से भारत को झटका?

USTR

अमेरिका के नए टैरिफ प्रस्ताव से भारतीय उद्योगों की बढ़ी चिंता

USTR अमेरिका और भारत के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ सकती है, जिससे कई निर्यात आधारित उद्योगों को झटका लगने की आशंका है।

अमेरिका का दावा है कि कई देशों ने ऐसे उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जो कथित तौर पर जबरन मजदूरी (Forced Labor) के जरिए तैयार किए जाते हैं। USTR का कहना है कि इससे अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसी आधार पर अमेरिका ने करीब 60 देशों की जांच शुरू की थी, जिसके बाद भारत सहित 54 देशों को अतिरिक्त टैरिफ के दायरे में लाने का प्रस्ताव सामने आया है।

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भारत ने आरोपों को किया खारिज

भारत ने अमेरिकी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। भारतीय पक्ष का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं और आपसी बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। भारत ने अमेरिका से इस जांच प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग भी की है। चूंकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, इसलिए अंतिम निर्णय से पहले कई दौर की चर्चाएं होने की संभावना है।

इन देशों पर भी पड़ सकता है असर

भारत के अलावा चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों का नाम भी इस सूची में शामिल बताया जा रहा है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों ने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। यदि 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लागू होता है, तो टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और अन्य कई उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है और निर्यात में गिरावट आने की आशंका बढ़ सकती है।

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आगे क्या होगा?

USTR ने इस प्रस्ताव पर विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। जुलाई में इस मामले पर सुनवाई भी प्रस्तावित है। ऐसे में अंतिम फैसला आने तक भारतीय उद्योग जगत और निर्यातक अमेरिका के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इस संभावित शुल्क वृद्धि को टाला भी जा सकता है।

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