
Cockroach देशभर में खराब सड़कों, गंदगी, जलभराव और नागरिक सुविधाओं की बदहाली के खिलाफ युवाओं ने विरोध का एक नया और अनोखा तरीका अपनाया है। सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अब डिजिटल दुनिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच गई है। पार्टी का #LifeOfACockroach अभियान इन दिनों इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अभियान के तहत युवा अपने क्षेत्रों की टूटी सड़कों, गड्ढों, कूड़े के ढेर, बंद नालियों और अन्य नागरिक समस्याओं की तस्वीरें और वीडियो साझा कर रहे हैं। इन पोस्ट्स के जरिए स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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गड्ढों के साथ सेल्फी और कचरे को 5-स्टार रेटिंग
अभियान की सबसे दिलचस्प बात इसका व्यंग्यात्मक अंदाज है। युवा बड़े-बड़े गड्ढों के साथ सेल्फी लेकर उन्हें “सर्वाइवल टेस्ट” बता रहे हैं। वहीं कचरे के ढेर और बदहाल इलाकों को सोशल मीडिया पर “पर्यटन स्थल” बताकर 5-स्टार रेटिंग दी जा रही है। इसके अलावा स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को टैग करते हुए “बेस्ट सिविक फेलियर अवॉर्ड” जैसे डिजिटल प्रमाण पत्र भी साझा किए जा रहे हैं।
CJI की टिप्पणी के बाद शुरू हुई पहल
इस अभियान की शुरुआत उस समय चर्चा में आई जब भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की एक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। इसके बाद कई युवाओं ने “कॉकरोच” शब्द को व्यंग्यात्मक प्रतीक के रूप में अपनाते हुए अपनी नाराजगी और समस्याओं को उजागर करना शुरू किया।
अभिजीत दीपके ने शुरू की मुहिम
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर निवासी Abhijit Deepke ने इस डिजिटल अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में इसे एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया प्रयोग माना गया, लेकिन देखते ही देखते यह युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया।
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सोशल मीडिया अकाउंट पर विवाद
अभियान के बढ़ते प्रभाव के बीच CJP के सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई भी हुई। संगठन का दावा है कि उसका मूल अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया, जिसके बाद नए हैंडल के जरिए अभियान जारी रखा गया। इस मामले को लेकर अदालत में भी याचिका दायर की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा मामला
इस मामले की सुनवाई के दौरान Delhi High Court ने तत्काल राहत देने से इनकार किया, लेकिन संबंधित समीक्षा समिति को मामले की जांच कर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा जरूरी है और मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।
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युवाओं के गुस्से की नई अभिव्यक्ति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल एक सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं, बल्कि नागरिक समस्याओं और युवाओं की बढ़ती निराशा को व्यक्त करने का नया माध्यम बन गया है। व्यंग्य और रचनात्मकता के जरिए उठाए जा रहे ये सवाल अब प्रशासन और सरकारों का ध्यान भी खींच रहे हैं।
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