शाश्वत तिवारी
पोर्ट ऑफ स्पेन। ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत के संबंधों को गहरा करने और ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ को मजबूत करने के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक और रहा, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का हाल ही में जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो का तीन-देशीय दौरा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य कैरेबियाई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक जुड़ाव और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई देना था। जयशंकर 2 से 10 मई तक तीन कैरेबियाई देशों की आधिकारिक यात्रा पर रहे और उनके इस दौरे का आखिर पड़ाव त्रिनिदाद और टोबैगो रहा, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री कमला पर्सद-बिसेसर से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद का दौरा भी किया, जहां प्रधानमंत्री ने उनके सम्मान में वक्तव्य दिया।

उन्होंने सीनेट के अध्यक्ष और प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष से भी संसदीय सहयोग पर चर्चा की। यहां उनकी यात्रा की शुरुआत विदेश एवं कैरिकॉम मामलों के मंत्रालय में एक औपचारिक ध्वजारोहण समारोह के साथ हुई, जबकि यात्रा का समापन भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के साथ हुआ। विदेश मंत्री की यात्रा के प्रमुख पहलू पर गौर करें तो इस दौरान भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए 8 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा पीएम मोदी की पिछली प्रतिबद्धता को पूरा करते हुए, जयशंकर ने स्कूली बच्चों को ‘मेड इन इंडिया’ 2,000 लैपटॉप का पहला जत्था भी सौंपा। विदेश मंत्रालय ने 10 मई को एक बयान में कहा दोनों देशों के बीच साइन हुए एमओयू पर्यटन, टी एंड टी विदेश मंत्रालय की इमारत को सौर ऊर्जा से लैस करने, वेक्टर नियंत्रण, नेल्सन द्वीप के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में आयुर्वेद पर एक ‘इंडियन चेयर’ स्थापित करने से जुड़े क्षेत्रों में हैं।
मंत्रालय ने कहा विदेश मंत्री ने यहां राष्ट्रीय कृषि विपणन और विकास निगम की एक कृषि-प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया। इस सुविधा के लिए पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी ने एक मिलियन अमेरिकी डॉलर की मशीनरी सौंपी थी। इसके अलावा डॉ. जयशंकर ने ‘राष्ट्रीय कृत्रिम अंग केंद्र’ का उद्घाटन भी किया। दोनों पक्षों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, फोरेंसिक, स्वास्थ्य सेवा, गिरमिटिया विरासत की खोज, क्षमता निर्माण आदि जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इससे पहले जयशंकर का जमैका और सूरीनाम का दौरा भी ऐतिहासिक रहा। यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की जमैका की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जो भारत के ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘ग्लोबल साउथ’ के एजेंडे के तहत इस क्षेत्र के साथ संबंधों को महत्व देने का संकेत है। तीन-देशीय दौरा यह दर्शाता है कि भारत विकासशील देशों के समूह (ग्लोबल साउथ) में एक अग्रणी और भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभरा है। यही वजह है कि बहुपक्षीय मंचों पर भी विकासशील देशों की ओर से भारत पर निरंतर भरोसा जताया जा रहा है।
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