विद्यालय में नए सत्र का स्वागत नई उम्मीदों का नया अध्याय

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विद्यालय में नए सत्र का स्वागत नई उम्मीदों का नया अध्याय

ऋचा सिंह

विद्यालय हर अप्रैल स्कूल के गेट पर नया सत्र दस्तक देता है। बस्ते बदलते हैं, किताबें बदलती हैं,यूनिफॉर्म की क्रीज़ नई होती है और बच्चों की कक्षाएं भी नई हो जाती हैं । पर क्या हमारी सोच भी बदलती है? कि इस सत्र में हम बच्चों को पहले से उपयोगी और बेहतर क्या दे रहें हैं? सत्र का बदलना सिर्फ कैलेंडर का पन्ना पलटना नहीं है बल्कि यही सही समय है तैयारी का। अप्रैल की सुबह स्कूल की घंटी सिर्फ बच्चों को नहीं जागाती बल्कि पूरे समाज को एक नई शुरुआत का एहसास दिलाता है। अप्रैल का नया सत्र बस कॉपी किताब बदलने का सीजन नहीं है यह उस बदलाव की आहट है जिसे 3वर्ष पूर्व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में लिखा गया था जो अब स्कूल की चौखट चढ़ रहा है। तो क्या हमने कोई ऐसी योजना बना ली है कि नए शैक्षिक सत्र में हम बच्चों को कितनी तैयारी के साथ उन्नतशील शिक्षा और कौशल देने जारहे हैं। हमारे और बच्चों के बीच में प्रारम्भ होने वाली यह यात्रा जिसमे सीखना सिखाना मुख्य उदेश्य है इसको रोचक व सरल बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस साल अगर अभिभावक और शिक्षक अपनी भूमिका में बदलाव ले आएं, तो बच्चों का सीखना सरल, सहज व रोचक हो सकता है। ऐसे में शिक्षा से जुड़े हर व्यक्ति का (शिक्षक, अभिभावक ) स्वयं से यह सवाल होना ही चाहिए की नए शैक्षिक सत्र में नया क्या? ‘नया’ क्या होना चाहिए और सत्र को ‘रोचक व उपयोगी’ कैसे बनाएं।

शिक्षकों के लिए ‘नया’ क्या होना चाहिए?

NEP कहती है कि टीचर ‘सेज ऑन द स्टेज’ से ‘गाइड बाय द साइड’ बनें। यह लाइन भाषण से निकलकर आपकी डेली डायरी में आनी चाहिए।पढ़ाने का तरीका लेक्चर से लर्निंग एक्सपीरियंस तक होना चाहिए। चॉक एंड टॉक छोड़ें, एक्टिविटी पकड़ें कक्षा 3 को ‘फोटोसिंथेसिस’ पढ़ाना है? बोर्ड पर डायग्राम बनाने से पहले बच्चों से पूछें, “घर में तुलसी का पौधा धूप में क्यों रखते हैं?”जवाब से कॉन्सेप्ट तक ले जाएं। NEP का मूल है ‘अनुभव से अवधारणा’। ‘बैग-लेस डे’ को गंभीरता से लें साल में 10 दिन तय हैं। इसे पिकनिक और पढ़ाई से छुट्टी न समझे बल्कि सीखने का अवसर देकर संवाद करें। अगर कक्षा 6 के बच्चों को एक्सपोजर हेतु कुम्हार, ईट भट्टे या किसी छोटी फर्म के पास ले जा रहे हैं, तो पहले से वर्कशीट दें मिट्टी के प्रकार, लागत, आकार का गणित समझने की दृष्टि विकसित करें। लौटकर प्रेजेंटेशन कराएं। हुनर के साथ अकादमिक जुड़ाव ही NEP है। हर बच्चे का ‘लर्निंग मैप’ बनाएं। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड HPC की अनिवार्यता और बच्चों के समग्र विकास में इसके महत्व को समझे । सिर्फ नंबर न भरें, लिखें कि बच्चे समहू और कक्षा में कैसे रहते हैं । यह मैप पैरेंट्स को दें जिससे टीचर की कलम अब सिर्फ लाल निशान नहीं, रास्ता दिखाने वाली टॉर्च बने।
मूल्यांकन डराने का नहीं, दिशा देने का औज़ार बने ‘गलती’ शब्द को डिक्शनरी से निकालें। बच्चे को कहें, “यह पहला प्रयास है, दूसरा बेहतर होगा।” फॉर्मेटिव असेसमेंट हर 3 महीने पर, प्रोजेक्ट, रोल-प्ले, पियर रिव्यू से नंबर दें। जो बच्चा बोलने में तेज़ है पर लिखने में कमज़ोर, उसे मौखिक प्रेजेंटेशन से अंक मिलें। DIKSHA और AI साथी का इस्तेमाल सिखाएं। होमवर्क दें कि “आज का चैप्टर पढ़कर DIKSHA पर क्विज़ दो और अपने से छोटे बच्चों के साथ डिसकस करो । जो बच्चा क्लास में चुप है, वह AI से 10 सवाल पूछ लेगा। टेक्नोलॉजी बस आपके मनोरंजन का साधन नहीं,असिस्टेंट टीचर और साथी भी है ऐसी समझ विकसित करें। खुद को भी अपग्रेड करते रहें, 50 घंटे की निष्ठा ट्रेनिंग बहुत उपयोगी है इसमें साइबर सेफ्टी, जेंडर सेंसिटिविटी, क्लासरूम मैनेजमेंट, सभी है। ज़ब हम स्वयं को अपडेट करते रहेंगे, सीखना जारी रखेंगे तभी हम बच्चों को भी सिखा सकेंगे। हर महीने एक नई टीचिंग स्ट्रेटेजी ट्राई करें और साथी शिक्षकों से भी शेयर करें,कभी स्टाफ रूम में और कभी बैठकों में।

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अभिभावकों यानी माता-पिता के लिए ‘नया’ क्या होना चाहिए?

स्कूल 6 घंटे संभालता है, घर 18 घंटे। NEP तभी सफल होगी जब घर का कल्चर भी बच्चों के संदर्भ में बदलेगा।आज बदलते समय में अभिभावकों और परिवारों की भूमिका में बदलाव आया है। ऐसे में रिज़ल्ट की जगह रूटीन पर फोकस करें ‘कितने नंबर’ पूछना बंद करें पूछें, “आज स्कूल में कौन सी एक चीज़ ऐसी सीखी जो कल नहीं पता थी?” और “किस दोस्त की मदद की?” NEP नंबर से वैल्यू की ओर लेजाने व मानवीय मूल्यों की समझ बच्चों में विकसित कर नैतिक रूप से भी शक्षम बनाने की सिफारिस करती है । आप भी विचारों को शिफ्ट करें जीवन में सफलता के साथ सार्थकता और मानवीयता को भी महत्व दें। PTM को ‘कोर्ट’ न बनाएं। टीचर के पास शिकायत लेकर न जाएं, सुझाव लेकर जाएं। HPC में अगर लिखा है ‘बच्चा जिज्ञासु है पर ध्यान भटकता है’, तो घर पर 20 मिनट का ‘फोकस टाइम’ सेट करें। स्कूल-होम पार्टनरशिप का मतलब यही है। हुनर को इज़्ज़त दें,जब स्कूल ‘बैग-लेस डे’ पर बच्चे को इलेक्ट्रिशियन के पास ले जाए, तो ये न कहें कि “हमारा बच्चा यह नहीं बनेगा बनेगा”। NEP का विज़न है कि हर बच्चा हुनर और कौशल भी जाने। इंजीनियर को भी प्लग ठीक करना आना चाहिए। डिजिटल बैलेंस बनाएं। स्क्रीन टाइम बांटें, बैन न करें। 1 घंटा DIKSHA/YouTube एजुकेशनल, 30 मिनट गेम। ‘यूट्यूब किड्स’ और ‘गूगल फैमिली लिंक’ से टाइमर लगाएं। आप खुद रील स्क्रॉल करते रहेंगे तो बच्चा क्यों मानेगा? ऐसे में स्वयं के लिए भी नियम और अनुशासन बनायें।तुलना का ज़हर घर से निकालें “उनके बेटी -बेटा को देखो” — यह लाइन नए सत्र में बैन। NEP कहती है हर बच्चा यूनिक है। एक कोडिंग करेगा, दूसरा खेती में विज्ञान का सहयोग लेकर उनत्त क़ृषि करेगा, ड्रोन चलाएगा। आपका काम बच्चे की तुलना करना नहीं, टैलेंट पहचानना है।

बच्चों के लिए सत्र रोचक और उपयोगी कैसे बने?

यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। शिक्षक और पैरेंट्स मिलकर ये 7 कार्य करें तो बच्चा सोमवार को भी स्कूल के लिए उत्साहित रहेगा।

1. क्लासरूम को ‘संवाद घर’ बनाएं: टीचर हर पीरियड की शुरुआत 2 मिनट के ‘वंडर टाइम’ से करें। “आज बारिश क्यों नहीं हुई?” “पंखा सिर्फ ऊपर ही क्यों लगता है?” जिस दिन बच्चे सवाल पूछने लगें, समझो सीखना शुरू। पैरेंट्स घर पर ‘डिनर टेबल पर बच्चों से संवाद करें सवाल’ रखें।

2. सिलेबस को ज़िंदगी से जोड़ें: गणित का प्रतिशत बाज़ार में सिखाएं। “500 की शर्ट पर 20% छूट है, कितने का पड़ेगा?” विज्ञान का वाष्पीकरण, संघनन दूध उबालते समय दिखाएं। इतिहास में लोकल फ्रीडम फाइटर का घर दिखाएं। किताब बंद होगी, पर चैप्टर दिमाग में छप जाएगा।

3. प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग हर महीने:अप्रैल: अपना दिनचर्या बनायें,‘पानी बचाओ’ पर मॉडल। मई: ‘अपने मोहल्ले का मैप’। जून: ‘घर का बजट’ ऐसे कार्य देते रहें। प्रोजेक्ट में रिसर्च, टीमवर्क, प्रेजेंटेशन, जैसे कार्य और चर्चा । ऐसे एग्ज़ाम का डर अपने-आप कम होगा क्योंकि बच्चा सालभर सीख रहा है।

4. खेल और कला अनिवार्य, एक्स्ट्रा नहीं: NEP कहती है कि कला, खेल, योग ‘को-करिकुलर’ नहीं ‘करिकुलर’ हैं। रोज़ 40 मिनट फिजिकल एक्टिविटी स्कूल में तय करें। पैरेंट्स शाम को 1 घंटा मोबाइल छोड़कर बच्चों के साथ कोई खेल खेलें क्युकी तन स्वस्थ तो मन स्वस्थ। शरीर और मन दोनों एक दूसरे को प्रभावित करते हैं ऐसी समझ विकसित करें।

5. लोकल से ग्लोबल का पुल: सोशल साइंस में राप्ती नदी का प्रदूषण पढ़ाएं और फिर बच्चों से पूछें, “जापान की नदियां साफ कैसे हैं?” बच्चे गूगल करेंगे, तुलना करेंगे। जड़ें अपनी, नज़र दुनिया पर। यही NEP का ‘इंडियन रूटेड, ग्लोबल आउटलुक’ है।

6. सेल्फ असेसमेंट की आदत कक्षा 4 से हर शुक्रवार आखिरी 10 मिनट। बच्चे डायरी में लिखें ‘इस हफ्ते क्या अच्छा किया? कहां दिक्कत आई? अगले हफ्ते क्या सुधारूंगा?’ टीचर साइन करें, पैरेंट्स रविवार को पढ़ें और बच्चों को दिशा प्रदान करें । ऐसे कार्यों, प्रोजेक्ट और संवाद से 6 महीने में बच्चा खुद ही विषय और स्किल को समझने लगेगा ऐसे में पढ़ाई सरल व सहज होगी।

7. सेलिब्रेट स्मॉल विन्स: पहाड़ा याद हुआ, पहली बार साइकिल चलाई, दोस्त से झगड़ा सुलझाया तो बच्चों को शाबासी और पुरस्कार दें। क्लास में ‘स्टार ऑफ द वीक’ सिर्फ पढ़ाई में टॉपर नहीं, ‘हेल्पिंग हैंड’ भी बने। एप्रिसिएशन सबसे बड़ा मोटिवेशन है।

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हम मिलकर यह त्रिकोण पूरा करें, तभी चित्र पूरा होगा। शिक्षा एक त्रिकोण है जिसमें बच्चा, शिक्षक, अभिभावक तीनो आते हैं। 2026 -27का सत्र हमें मौका देता है कि इस त्रिकोण की तीनों भुजाएं मजबूत करें जिसके केंद्र में बच्चे का होलेस्टिक डेवलोपमेन्ट है। शिक्षक अगर क्लासरूम को प्रयोगशाला बना दें। अभिभावक अगर घर को पहला स्कूल मान लें और बच्चा अगर सवाल पूछने से डरना छोड़ दे। तो यकीन मानिए, 10 साल बाद हमें ‘स्किल गैप’ और ‘बेरोज़गारी’ जैसे शब्दों का समाधान नहीं ढूंढना पड़ेगा। नया सत्र नई कार्ययोजना बनाने का मौका है जिसके केंद्र में देश के भावी कर्णधार है। कॉपी नई है, कलम हमारे हाथ में है और NEP2020 ने रोड मैप तैयार रखा है जिसके अलोक में परिवार और स्कूल को बच्चों का स्वर्णिम भविष्य लिखना है । अब हमारी लिखावट बताएगी की हम कितने निष्ठावान है

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