
Haldwani Controversy: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धीकरण’ को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी दलित नेता के किसी स्थान पर जाने के बाद वहां शुद्धीकरण जैसी गतिविधि किया जाना सामाजिक भेदभाव की सोच को दर्शाता है। राहुल गांधी ने इस मामले में जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान ने छुआछूत को समाप्त कर दिया है, लेकिन समाज में ऐसी मानसिकता के उदाहरण अब भी देखने को मिलते हैं।
खरगे की रैली के बाद क्या हुआ?
मल्लिकार्जुन खरगे ने आठ अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ को संबोधित किया था। कांग्रेस के अनुसार, रैली के दो दिन बाद 10 अगस्त को कुछ लोगों ने कार्यक्रम स्थल पर हवन और कथित शुद्धीकरण अनुष्ठान किया। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खरगे की जातिगत पहचान की वजह से मैदान का शुद्धीकरण कराया गया। दूसरी तरफ भाजपा ने इस आयोजन से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।
जिस संगठन से जुड़े लोगों द्वारा यह अनुष्ठान किए जाने की बात सामने आई, उसकी ओर से अलग तर्क दिया गया। संगठन का दावा है कि कांग्रेस की सभा के दौरान कथित तौर पर ऐसे नारे लगाए गए थे, जिन्हें रामलीला मैदान की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रकृति के खिलाफ माना गया। इसी के विरोध में अनुष्ठान किए जाने की बात कही गई।
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राहुल गांधी ने उठाया छुआछूत का मुद्दा
राहुल गांधी ने कहा कि खरगे ने लंबे समय तक देश और संविधान के लिए काम किया है। उनके अनुसार, ऐसे नेता के किसी कार्यक्रम के बाद ‘शुद्धीकरण’ किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे केवल हल्द्वानी की घटना तक सीमित न रखते हुए देश में जातिगत भेदभाव की व्यापक समस्या से जोड़ दिया। राहुल गांधी ने कहा कि दलित समुदाय को आज भी कई स्तरों पर सामाजिक असमानता का सामना करना पड़ता है।
राहुल गांधी ने स्कूलों में कथित तौर पर दलित बच्चों से सफाई कराने, सार्वजनिक स्थानों पर भेदभाव और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के स्रोतों के इस्तेमाल को लेकर अलग व्यवहार जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समानता के लिए कानून के साथ-साथ लोगों की सोच में बदलाव भी जरूरी है।
संविधान में छुआछूत के खिलाफ स्पष्ट प्रावधान
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 छुआछूत को समाप्त करता है और इसके किसी भी रूप में व्यवहार पर रोक लगाता है। इसके अलावा नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के तहत भी छुआछूत से जुड़े मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है। राहुल गांधी ने इसी संवैधानिक व्यवस्था का हवाला देते हुए हल्द्वानी मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की।
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BJP ने आरोपों से बनाई दूरी
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कथित अनुष्ठान करने वाले संगठन का पार्टी से सीधा संबंध नहीं है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही थी। वहीं, उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस पूरे विवाद को अलग नजरिए से देखते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस की सभा के दौरान कथित तौर पर कुछ ऐसी गतिविधियां हुई थीं, जो रामलीला मैदान की धार्मिक प्रकृति के अनुरूप नहीं थीं।
सियासत में बढ़ा विवाद
हल्द्वानी की इस घटना ने अब जातिगत भेदभाव, धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक बयानबाजी को एक साथ बहस के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे दलित सम्मान और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक रूप से तूल दिए जाने का आरोप लगा रही है।
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