मंत्री के सामने वसूली का मामला आने पर होगी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई!

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  • आगरा के प्रभारी मंत्री की समीक्षा बैठक में उठा जेल में हो रही जेल में वसूली का मुद्दा
  • शासन और मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग रखने वाले पर नहीं होती कोई कार्रवाई

लखनऊ। प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह से शिकायत के बाद भ्रष्टाचार और वसूली में संलिप्त आगरा जेल अधीक्षक पर कोई कार्रवाई होगी। यह सवाल विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि इस जेल में गिनती कटवाने और मशक्कत के नाम पर चल रही अवैध वसूली का सिस्टम इतना मजबूत है कि उसे रोक पाना आसान नहीं है। जिस जेल को विभाग में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के जनक कहे जाने वाले एआईजी जेल प्रशासन और परिक्षेत्र के डीआईजी का संरक्षण प्राप्त हो उस अधीक्षक के खिलाफ प्रभारी मंत्री के कहने पर कार्रवाई हो पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन माना जा रहा है। आलम यह है कि इस विभाग में मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस की तो जमकर धज्जियां उड़ाई ही जा रही है। इसके साथ ही नौकरशाह मुख्यमंत्री की पाक साफ छवि को भी धूमिल करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहे हैं।

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मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के पर्यटन मंत्री एवं आगरा जनपद के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को नवीन सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों के साथ समीक्षक बैठक की। इस बैठक में आगरा जिला जेल में बंदियों से गिनती कटवाने और मशक्कत के नाम पर पांच पांच रुपए की अवैध वसूली किए जाने का मुद्दा उठाया गया।

प्रभारी मंत्री ने जब जेल अधीक्षक से जवाब मांगा तो जेल अधीक्षक के हाथ पांव फूल गए। उन्होंने आरोप को खारिज करते हुए मामले पर चुप्पी साध ली। सूत्रों को कहना है कि इससे पूर्व हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने सीएम और जिला प्रशासन को एक पत्र और वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि जेल में बंदी के प्रवेश करते ही वसूली शुरू हो जाती है।

मशक्कत, बैठकी, हाता और मनचाही बैरेक में जाने के लिए अधिकारी बंदियों से मोटी रकम वसूल करते है। इस शिकायत के अलावा हाल ही में क्रिप्टो करेंसी के मामले में बंद एक बंदी से जेल अधिकारियों ने गिनती कटवाने के नाम पर एक करोड़ रुपए की मांग की गई। मामला सुर्खियों में आने के बाद भी विभाग के आला अफसरों ने दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए मामले को दबा दिया।

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सूत्रों का कहना है पिछले करीब तीन साल से आगरा जिला जेल में जमे जेल अधीक्षक का शासन और कारागार मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग के माध्यम से दबदबा बना हुआ है। प्रमुख सचिव से लेकर डीजी जेल और आगरा जे परिक्षेत्र के डीआईजी तक इनके खिलाफ कार्रवाई करने से घबराते है।

यही वजह की जेल खुलेआम हो रहे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायतें होने के बाद भी आजतक किसी भी दोषी जेल अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। ऐसे में प्रभारी मंत्री से शिकायत के बाद कार्रवाई होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगता है।

उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन ही नहीं उठा।

लखनऊ से हो रही आगरा परिक्षेत्र के जेलों की निगरानी

आगरा जेल परिक्षेत्र के डीआईजी प्रेमनाथ पांडे आगरा जेल की वसूली को जानकर भी अंजान बने हुए है। डीआईजी के पास आगरा परिक्षेत्र के साथ डीआईजी मुख्यालय का भी अतिरिक्त प्रभार है। बताया गया है कि डीआईजी सप्ताह में पांच दिन लखनऊ और दो दिन आगरा में रहकर आगरा परिक्षेत्र की आठ जेलों की निगरानी करते है। सूत्रों की माने तो आगरा जिला जेल से मोटा लिफाफा मिलने की वजह से वह सब कुछ जानकर भी अंजान बने रहते है।

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