महेशपुर भंसार अब तक ठप: समझौते के बावजूद संचालन नहीं, पूर्व मेयर विजय अग्रहरि ने उठाए सवाल

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  • सोनौली में ट्रकों की लंबी कतार, महेशपुर खाली-पूर्व मेयर ने सरकार से की तत्काल कार्रवाई की मांग

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

नवलपरासी (पश्चिम) जिले के महेशपुर क्षेत्र में स्थित “महेशपुर भंसार” कार्यालय आज भी पूरी तरह संचालन में नहीं आ पाया है, जबकि यह भारत-नेपाल के बीच हुए समझौते के तहत “बड़ा भंसार” कार्यालय घोषित किया गया था। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के पूर्व मेयर और उद्योग-व्यापार से जुड़े वरिष्ठ नेता विजय अग्रहरि ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व मेयर ने बताया कि जब माधव कुमार नेपाल प्रधानमंत्री थे और राजेंद्र महतो वाणिज्य/आपूर्ति मंत्रालय से जुड़े थे, उस समय दोनों देशों के बीच सहमति बनाकर महेशपुर को एक बड़े (भंसार कार्यालय) कस्टम प्वाइंट के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए बजट भी स्वीकृत हुआ और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन योजना अधूरी रह गई।

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उन्होंने कहा कि वर्तमान में महेशपुर भंसार कार्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां क्वारंटाइन प्लांट तक नहीं है, जिससे खाद्यान्न, फल-सब्जी और अन्य वस्तुओं का आयात-निर्यात संभव नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर, पास के सोनौली बॉर्डर पर ट्रकों की लंबी कतारें लगी रहती हैं और गाड़ियों को 5–6 दिनों तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन महेशपुर भंसार का उपयोग नहीं किया जा रहा।

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पूर्व मेयर ने बताया कि उन्होंने सोनौली कस्टम अधिकारियों से आग्रह किया था कि जब तक नेपाल सरकार इसे पूर्ण रूप से चालू नहीं करती, तब तक इसे अस्थायी रूप से सोनौली कस्टम के अधीन संचालित किया जाए, लेकिन इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय दूतावास की ओर से भी दो बार पत्र भेजकर महेशपुर भंसार कार्यालय को संचालन में लाने की अपील की जा चुकी है, फिर भी नेपाल सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही है। यहां तक कि भंसार का “एग्जिट कोड” भी अभी तक सक्रिय नहीं किया गया है।

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पूर्व मेयर विजय अग्रहरि ने नेपाल की वर्तमान बालेन सरकार से मांग की है कि महेशपुर भंसार को अविलंब चालू किया जाए और नवलपरासी जिले में एक “आंतरिक राजस्व कार्यालय” की स्थापना की जाए। उनका कहना है कि इस क्षेत्र से अरबों रुपये का राजस्व जाता है, लेकिन सुविधाएं नगण्य हैं। साथ ही हाल ही में चुने गए सांसदों क्रमश: नरेंद्र गुप्ता और विक्रम खनाल से भी इस मुद्दे को प्राथमिकता देने की अपील की गई है। दोनों सांसदों ने इस समस्या के समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी जताई है।

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