ओडिसा के जगन्नाथ मंदिर के नीचे मिला 1078 ईस्वी का गंगा राजवंश कालीन अवशेष

  • मंदिर के भूगर्भ से समुद्र तक गुप्त सुरंग,
  • पूरे शहर के नीचे एक उन्नत शहर के मिले प्रमाण
  • जीपीआर सर्वे में हुआ खुलासा

रंजन कुमार सिंह

भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी के धरातल के नीचे एक प्राचीन शहर के अवशेष मिलने से कौतूहल मच गया है। सनसनीखेज दावों के अनुसार, जगन्नाथ मंदिर के नीचे एक गुप्त सुरंग का भी पता चला है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि यह सीधे समुद्र से जुड़ी थी। यह चौंकाने वाला खुलासा हाल ही में किए गए जीपीआर सर्वेक्षण के दौरान हुआ है। इस खोज की शुरुआत  मंदिर परिक्रमा परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान हुई, जब खुदाई कर रहे श्रमिकों को एक प्राचीन सिंह की मूर्ति मिली। पुरातत्वविदों ने प्रारंभिक जांच के बाद दावा किया कि यह अवशेष शक्तिशाली गंगा राजवंश के काल के हैं। इसके बाद ही भूगर्भ की गहराई नापने के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन वाली जीपीआर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के नीचे मिले ये अवशेष केवल मंदिर परिसर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक विशाल प्राचीन नगर का हिस्सा हैं जो पूरे पुरी में फैला हुआ था। शोधकर्ताओं के अनुसार, एमार मठ, नृसिंह मंदिर, बूढ़ी मां मंदिर और आसपास की सड़कों सहित लगभग 43 क्षेत्रों में ये पुरातात्विक साक्ष्य बिखरे हुए हैं। खुदाई के दौरान प्राचीन काल के मिट्टी के बर्तन, धातु की वस्तुएं और दैनिक उपयोग के उपकरण भी मिले हैं, जो वहां एक उन्नत सभ्यता और बस्ती की ओर इशारा करते हैं।

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इससे पहले खुदाई में सिंह की दो मूर्तियां और लगभग 30 फीट लंबी एक दीवार भी मिली थी, हालांकि वे कुछ हद तक क्षतिग्रस्त थीं। साथ ही, 7.6 मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा एक कक्ष भी पाया गया है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि प्राचीन काल में इस कक्ष का उपयोग स्वर्ण जड़ित मूर्तियों की पूजा के लिए किया जाता होगा। पुरातत्वविदों ने इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर देते हुए और अधिक सावधानीपूर्वक खुदाई करने की मांग की है। उड़ीसा (ओडिशा) के पुरी और पूरे कलिंग क्षेत्र में पूर्वी गंगा राजवंश (Eastern Ganga Dynasty) का शासन मुख्य रूप से 11वीं शताब्दी के अंत से 15वीं शताब्दी के मध्य (लगभग 1078-1434/35 ईस्वी) तक था।

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इस राजवंश से संबंधित मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं,

स्थापना और विस्तार: इस वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव ने 11वीं शताब्दी के अंत में उड़ीसा में अपनी सत्ता स्थापित की। उन्होंने ही पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था।

शासक: चोडगंगदेव के अलावा, अनंगभीम तृतीय और नरसिंहदेव प्रथम इस वंश के अन्य प्रमुख शासक थे।

वास्तुकला: गंगा वंश के राजाओं ने कला और वास्तुकला को बहुत बढ़ावा दिया, जिसमें कोणार्क का सूर्य मंदिर (नरसिंहदेव प्रथम द्वारा निर्मित) सबसे प्रसिद्ध है। अंत: 1434-35 ईस्वी में भानुदेव चतुर्थ के शासनकाल के अंत के साथ ही गंगा वंश का शासन समाप्त हुआ और सूर्यवंश राजवंश की शुरुआत हुई। यद्यपि कुछ शुरुआती पूर्वी गंगा शासक 5वीं शताब्दी से भी सक्रिय थे, लेकिन पुरी और उड़ीसा के मुख्य भाग पर उनका स्वर्ण युग 11वीं-15वीं शताब्दी के बीच ही रहा।

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