- पेशेवर ने बदला ट्रैक, अपने बन रहे कातिल, सूचीबद्ध अपहर्ता और पेशेवर अपराधियों ने बदले रास्ते
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। किडनैपिंग किंग बबलू श्रीवास्तव। पीपी गैंग का सरगना प्रकाश पांडेय। बिहार का शातिर अपराधी फजलुर्रहमान। मुठभेड़ में मारे गए शार्प शूटर श्रीप्रकाश शुक्ला और डकैत निर्भय गुर्जर। जरायम की दुनिया के ऐसे ही कई बड़े पेशेवर नाम अब लोगों को नहीं डराते। कई मुठभेड़ में ढेर हो गए तो कई ने ट्रैक बदल लिया। कई जमीन के धंधे में उतर गए तो कुछ ने सफेदपोशों का दामन थाम लिया। कुछ सलाखों के पीछे हैं। बदलते परिवेश में लोग पेशेवर अपराधियों से अधिक अपनों खौफजदा हैं। शाह खर्ची और जल्द अमीर बनने की लालच में अंजाम की परवाह किए बगैर अपने ही अपनों का खून बहा रहे हैं। किसी को नशे की लत ने खूनी बना दिया तो कुछ लोग मनबढ़ कुख्यात अपराधी बन गए।
निगोहां थाना क्षेत्र स्थित शेखन खेड़ा गांव निवासी 44 वर्षीय राजेश्वरी की मामूली कहासुनी के बाद हुई हत्या अपराध के इसी नए समीकरण की एक कड़ी है। राजधानी में ऐसी कई राजेश्वरी अपनों के हाथों ही जान गंवा चुके हैं। यूपी में किडनैपिंग जैसी सनसनीखेज वारदात में पहले चंद नाम सामने आते थे। लेकिन अब तो घरेलू कलह, या फिर किसी और वजह को लेकर अपनों का खून बहाने से पीछे नहीं हैं। निगोहां निवासी राजेश्वरी सात फेरे लेने के बाद सपने में भी नहीं सोची थी कि वह अपने की ही निशाना बन जाएगी। नशेड़ी पति राजेश को शराब का नशा इस कदर हावी हुआ कि वह पत्नी को धारदार हथियार से हमला कर मौत की नींद सुला दिया। यह तो राजेश्वरी हत्याकांड का मामला है 23 फरवरी 2026 को आशियाना क्षेत्र के सेक्टर एल निवासी मानवेंद्र सिंह की जान भी किसी पेशेवर अपराधी नहीं बल्कि उन्हीं के बिगड़ैल सपूत अक्षत प्रताप सिंह ने पहले गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया फिर पिता के शरीर के टुकड़े कर हाथ-पैर जंगल में फेंक दिया था। यह तो महज बानगी भर है यहां इससे पहले भी कई अपनों की जान ले चुके हैं।
