नेपाल सीमा पर कबाड़ तस्करी का बड़ा खेल, संरक्षण के आरोप

Maharajganj

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

Maharajganj : भारत-नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले के ठूठीबारी थाना क्षेत्र में कथित कबाड़ तस्करी को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में कबाड़, पुराने मोटर पार्ट्स तथा अन्य सामग्री की अवैध आवाजाही का एक संगठित नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है। आरोप है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ प्रभावशाली कारोबारी और तस्कर अपने राजनीतिक एवं प्रशासनिक संपर्कों के दम पर कार्रवाई से बचते रहे हैं, जिसके कारण अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि भारत-नेपाल सीमा के कई संवेदनशील मार्गों का उपयोग कथित रूप से कबाड़ और अन्य सामान की आवाजाही के लिए किया जाता है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कई बार संभावित छापेमारी या जांच अभियान की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच जाती है, जिससे वे समय रहते अपने कारोबार को सुरक्षित कर लेते हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इस तरह की चर्चाएं लगातार सुनने को मिल रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सीमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कबाड़ और अन्य सामग्री का आवागमन हो रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका मानना है कि सीमा क्षेत्र में होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर संबंधित विभागों की निगरानी रहती है, ऐसे में अवैध गतिविधियों के आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि जो अधिकारी या कर्मचारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्ती दिखाने का प्रयास करते हैं, उन्हें विभिन्न स्तरों पर दबाव का सामना करना पड़ता है। कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली तस्कर और कारोबारी अपने रसूख का इस्तेमाल कर ईमानदार अधिकारियों को परेशान करने या उनका तबादला कराने की कोशिश करते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन चर्चाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में होने वाली किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि केवल राजस्व हानि का कारण नहीं बनती, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में समय-समय पर निगरानी, जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होता है।

फिलहाल संबंधित विभागों या प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यदि कोई अवैध नेटवर्क सक्रिय है तो उसका खुलासा हो सके और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

यदि लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला केवल कबाड़ तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीमा प्रबंधन, प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी तंत्र की जवाबदेही से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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