हट बे ‘पलटूराम’! सीएम साहब आ रहे हैं

Nitish Kumar
  • पलटूराम बुद्ध के आनंद से जॉर्ज के चेले तक, मौका-परस्ती की वो दास्तां
  • एपस्टीन-फाइल का सौदा या सियासत की आखिरी सांस?
  • कहाँ बुद्ध और जॉर्ज और कहा आनंद व नितीश कुमार
  • आत्मसमर्पण! लक्ष्य से भागा धावक, ट्रैक छोड़ गुजरात के पांव पर

कुमार सौवीर

बात बिहार पर। जमीन भी बिहार की, घटनाएं भी बिहार की और आस्‍था, निष्‍ठा और समर्पण बिहारियों का। दो सवाल और जवाब का संकेत भी। पलटूराम बुद्ध का सबसे बड़ा शिष्‍य था आनंद, जबकि जॉर्ज फर्नांडिस का सबसे बड़ा चेला रहे हैं नितीश कुमार। लेकिन आनंद और नितीश में बड़ा फर्क है। आनंद ने कभी भी बुद्ध की लीक को तनिक भी नहीं छोड़ा। आर्थिक मसले पर देखा जाए तो नितीश कुमार हमेशा शीर्षस्‍थ चेला रहे हैं, लेकिन आनंद के विपरीत नितीश की नैतिक छवि हमेशा एक घटिया मौका-परस्‍त नेता के तौर पर स्‍थापित हो चुकी है।

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कल जिस तरह उन्‍होंने अपनी राजगद्दी भाजपा को सौंपी है, उससे तो लोगों को विश्‍वास होने लगा है कि नितीश कुमार की एपस्टीन टाइप कोई बड़ी फाइल के साथ मोदी-शाह ने जबर्दस्‍त डील कर ली। इतनी कि नितीश के पास हांफते रहने के अलावा कोई रास्‍ता ही नहीं बचा है।

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आप किसी भी दौड़ को देख लें, जहां हर धावक पूरी ताकत लगा देता है। लक्ष्‍य के चरम तक के लिए। जीतने के बाद भले ही हांफना शुरू कर दे, लेकिन दौड़ के दौरान अपनी ट्रैक नहीं छोड़ता। लेकिन नितीश कुमार ने छोड़ दिया। अच्‍छे-खासे मुख्‍यमंत्री के रूतबा को छोड़ कर राज्‍यसभा की अदनी सी कुर्सी के लिए उन्‍होंने अपनी सारी छीछालेदर करा दी। पहले बिहार की सत्‍ता में केवल नितीश कुमार एक ही शीर्ष पर थे, लेकिन अब वे 16 में से एक केवल एक ही रह गये हैं।

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कहां आनंद और कहां पलटूराम नितीश कुमार।

बुद्ध का नाम आते ही अनिवार्य रूप से आनंद का नाम आ जाता है। लेकिन आज न तो जॉर्ज फर्नांडिस का कोई चेला बचा है और न ही नितीश कुमार के पास जॉर्ज फर्नांडिस जैसा कोई गुरू। कारण यह कि नितीश ने बिहार की जमीन पूजने के बजाय गुजरात के चरणों को लम्‍बलेट चरण-चुम्‍बन कर दिया। नितीश कुमार हो तो क्‍या हुआ। “हट बे। देख नहीं रहे हो कि नये सीएम साहब आ रहे हैं?

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