मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार खुलते ही देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों ने वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे तेल कीमतों पर पड़ता है।
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भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से देश में महंगाई बढ़ने की आशंका है। यही कारण है कि बाजार विशेषज्ञ सोमवार को शुरुआती कारोबार में 1–2 प्रतिशत तक गिरावट की संभावना जता रहे हैं। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। सबसे ज्यादा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे तेल की लागत बढ़ने से उनके मार्जिन प्रभावित होते हैं। इसके अलावा एविएशन सेक्टर भी दबाव में रह सकता है, क्योंकि विमान ईंधन की लागत एयरलाइंस के खर्च का बड़ा हिस्सा होती है।
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पेंट, टायर और लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि इनके उत्पादन और संचालन में पेट्रोलियम आधारित उत्पादों का उपयोग होता है। वहीं आईटी और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर रह सकते हैं, जहां निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में बाजार अत्यधिक अस्थिर रह सकता है। निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाने और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
