देश की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। हाल ही में सामने आई वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कंपनी को लगभग ₹20,000 करोड़ (करीब $2.4 बिलियन) का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा कंपनी के अनुमानित घाटे से काफी अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस भारी नुकसान के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। जून 2025 में हुए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर हादसे ने कंपनी को गहरा झटका दिया, जिसमें 240 से अधिक लोगों की जान गई। इस घटना के बाद एयरलाइन को कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सेवाओं में कटौती करनी पड़ी।
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इसके अलावा, भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी कंपनी के संचालन पर असर डाला। पाकिस्तान द्वारा एयरस्पेस बंद किए जाने और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण एयर इंडिया को अपने उड़ान मार्ग बदलने पड़े। इन नए मार्गों के कारण उड़ानों की दूरी और लागत दोनों में वृद्धि हुई। जेट ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि ने भी एयरलाइन के खर्च को बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एविएशन सेक्टर में ईंधन की लागत कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती है, जिससे मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है।
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इस स्थिति से उबरने के लिए एयर इंडिया ने अपने प्रमुख शेयरधारकों टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस से वित्तीय सहायता की मांग की है। दोनों पक्षों के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है। कंपनी को नेतृत्व संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। CEO द्वारा पद छोड़ने की घोषणा और विमानन नियामक द्वारा सुरक्षा ऑडिट में खराब रेटिंग ने कंपनी की छवि को प्रभावित किया है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय नीतियों, विशेष रूप से अमेरिकी व्यापार और वीजा नीतियों ने भी एयरलाइन की आय पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया को इस संकट से बाहर निकलने के लिए व्यापक रणनीतिक बदलाव करने होंगे।
