वाराणसी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महानगर इकाई ने बुधवार को संत समाज के सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान और उनके साथ हुए व्यवहार के विरोध में आयोजित किया गया। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।
कांग्रेस पदाधिकारियों का आरोप है कि अमावस्या के पावन अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायी गंगा स्नान के लिए पहुंचे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। नेताओं के अनुसार, संत और उनके शिष्यों के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। पार्टी का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल संत समाज का अपमान हैं, बल्कि धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़े लोगों की भावनाओं को भी प्रभावित करती हैं।
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महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने बयान जारी कर कहा कि संतों का सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है और उनके साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वामी और अन्य संतों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शंखनाद कर अपना विरोध दर्ज कराया और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहराई से जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। उनका कहना है कि संत समाज की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पार्टी हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वाराणसी में धार्मिक और राजनीतिक माहौल को चर्चा का विषय बना दिया है। अब प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई और जांच के परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
