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शासन मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग वाले अफसरों पर नहीं होती कार्रवाई!

  • कारागार विभाग के आला अफसरों का अजब गजब खेल
  • फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में वार्डर को निलंबित कर मामले को निपटाया

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। कारागार विभाग के आला अफसरों की महिमा अपरंपार है। इस विभाग में शासन और मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग रखने वाले अफसरों पर कोई कार्यवाही नहीं होती है। फरारी की घटना में वरिष्ठ अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर को निलंबित कर दिया जाता है वहीं आत्महत्या जैसी गंभीर घटना में वार्डर को निलंबित कर मामले को निपटा दिया जाता है। दिलचस्प बात तो यह है कि जिसकी शिथिलता से घटना हुई वही अधिकारी छोटे कर्मचारी को निलंबित कर मामले को निपटा दे रहा है।

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कन्नौज और अयोध्या जेल में 24 दिन के अंतराल में 04 बंदियों की फरारी के मामले में लापरवाही के लिए अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर समेत कई सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है अधीक्षक का जेलर पर, जेलर का डिप्टी जेलर पर, डिप्टी जेलर का सुरक्षाकर्मियों पर शिथिल नियंत्रण होने की वजह से यह कार्यवाही की गई। इस कार्यवाही पर विभाग के आला अफसरों का तर्क था कि सुरक्षा की जिम्मेदारी एक व्यक्ति की नहीं व्यवस्था की होती है। मातहतों पर शिथिल नियंत्रण होने की वजह से सभी जिम्मेदार अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की गई है।

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बताया गया है कि दो दिन पहले केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में निरुद्ध एक कैदी प्रभात कुमार ने अड़गड़े में अंगोछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस सनसनीखेज घटना के लिए वरिष्ठ अधीक्षक ने बैरेक के प्रभारी वार्डर को निलंबित कर मामले का निपटा दिया। इस मामले में न तो सर्किल प्रभारी जेलर और न ही जिस डिप्टी जेलर के प्रभार में बैरक थी उसके खिलाफ कोई कार्यवाही की गई। इसके साथ ही जेल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी जेल अधीक्षक के हाथों में होती है। जेल में अधीक्षक के निर्देश पर जेलर सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाते हैं। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि शासन और मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग रखने वाले अफसरों पर कोई कार्यवाही नहीं होती है। यही वजह है कि बुलंदशहर, उरई, मुजफ्फरनगर, मैनपुरी जेलों में तमाम शिकायतें मिलने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। उधर इस संबंध में प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से काफी प्रयासों के बाद भी बात नहीं हो पाई।

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वरिष्ठ अधीक्षक नहीं होने से प्रभावित हो रहा जेल परिक्षेत्रों का काम

कारागार मुख्यालय के आला अफसर कार्यों के प्रति सजगता का एक रोचक मामला प्रकाश में आया है। वर्तमान समय में अयोध्या और गोरखपुर जेल परिक्षेत्र की किसी भी जेल में वरिष्ठ अधीक्षक तैनात नहीं है। ऐसा तब है जब कारागार मुख्यालय में दो वरिष्ठ अधीक्षकों को तैनात कर रखा गया। वर्तमान समय में केंद्रीय कारागार नैनी के रंग बहादुर और केंद्रीय कारागार नैनी से ही निलंबित होकर बहाल हुए शशिकांत सिंह को मुख्यालय में तैनात कर रखा गया है। जबकि गोरखपुर और अयोध्या परिक्षेत्र में वरिष्ठ अधीक्षक नहीं होने से इन परिक्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक जेलों की दंडात्मक कार्यवाही की फाइलों का निस्तारण मुख्यालय स्तर से किया जा है। इन परिक्षेत्रों की मंडलीय कारागार पर वरिष्ठ अधीक्षक की जगह अधीक्षक तैनात कर रखे गए हैं।

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