हमीरपुर जिले के जिला उद्योग कार्यालय से जुड़ा एक गंभीर भ्रष्टाचार मामला सामने आया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और पत्रावलियों के निस्तारण के नाम पर अवैध वसूली किए जाने के आरोपों को सही पाए जाने के बाद शासन ने सख्त कदम उठाते हुए तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में सहायक आयुक्त उद्योग/प्रभारी उपायुक्त उद्योग रवि वर्मा, सहायक प्रबंधक संतोष राव और जिला प्रबंधक मिलन कुमार शामिल हैं। यह कार्रवाई मुख्य विकास अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी, हमीरपुर की ओर से गठित दो सदस्यीय जांच समिति की आख्या के आधार पर की गई है।
दरअसल, जिला उद्योग कार्यालय से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों द्वारा लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं। शिकायतों में आरोप था कि ऑनलाइन आवेदन स्वीकार कराने, फाइल आगे बढ़ाने, पत्रावली निस्तारण और सब्सिडी स्वीकृत कराने के बदले अधिकारियों द्वारा अवैध धन की मांग की जा रही है। शिकायतों की संख्या बढ़ने और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी।
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जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि तीनों अधिकारी आपसी मिलीभगत से सरकारी योजनाओं की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे थे। समिति की रिपोर्ट में अवैध वसूली से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने आए, जिसके बाद कठोर कार्रवाई की संस्तुति की गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल शासन की छवि धूमिल हो रही थी, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों को भी योजनाओं का लाभ मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तीनों अधिकारियों को निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि जिला उद्योग कार्यालय में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पात्र लोगों तक पहुंचेगा।
