शेयर बाजार में हर निवेशक का सपना होता है कि उसका लगाया गया पैसा समय के साथ कई गुना बढ़ जाए। ऐसे ही सपनों को हकीकत में बदलने वाले शेयरों को मल्टीबैगर कहा जाता है। बीते पांच वर्षों में GRM Overseas ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, जिसने बाजार के जानकारों और रिटेल निवेशकों—दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अगर किसी निवेशक ने करीब पांच साल पहले इस शेयर में ₹1 लाख का निवेश किया होता, तो आज उसकी वैल्यू लगभग ₹12.50 लाख के आसपास पहुंच चुकी होती। यानी करीब 1250% का जबरदस्त रिटर्न। यही वजह है कि एक बार फिर यह स्टॉक चर्चा में है और निवेशक जानना चाहते हैं—क्या आगे भी इसमें कमाल बाकी है?
मल्टीबैगर बनने की कहानी
GRM Overseas FMCG और एग्री-बेस्ड सेक्टर की एक जानी-मानी कंपनी है, जो खासतौर पर चावल और उससे जुड़े उत्पादों के कारोबार में सक्रिय है। कंपनी ने समय के साथ अपने बिजनेस मॉडल को मजबूत किया और एक्सपोर्ट मार्केट में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई। इसी का असर शेयर के लंबे समय के प्रदर्शन में साफ नजर आता है। बीते पांच सालों में कंपनी के शेयर ने धीमी लेकिन स्थिर रफ्तार से निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। यह उन गिने-चुने स्टॉक्स में शामिल हो चुका है, जिन्होंने छोटी रकम को बड़ी दौलत में बदल दिया। हाल के कारोबारी सत्रों में GRM Overseas के शेयर में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। बीएसई पर यह शेयर करीब ₹165 के स्तर पर बंद हुआ, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया कॉरपोरेट ऐलान के चलते इस स्टॉक पर आने वाले दिनों में नजर बनी रह सकती है।
ये भी पढ़े
वारंट कन्वर्जन से मिली बड़ी ताकत
कंपनी ने हाल ही में एक अहम कॉरपोरेट अपडेट साझा किया है। GRM Overseas के बोर्ड ने बड़ी संख्या में वारंट्स को इक्विटी शेयरों में बदलने की मंजूरी दी है। इस प्रक्रिया के जरिए कंपनी को ₹86 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग मिली है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब कंपनी के पास कोई भी वारंट पेंडिंग नहीं है। इससे न सिर्फ कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होती है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है। मजबूत कैश पोजिशन किसी भी कंपनी के भविष्य के विस्तार और स्थिरता के लिए अहम मानी जाती है।
GRM Overseas ने अपने शेयरधारकों के लिए 2:1 बोनस इश्यू की घोषणा भी की है। इसका मतलब है कि हर एक शेयर पर निवेशकों को दो अतिरिक्त शेयर मिलेंगे। बोनस शेयर का सीधा असर निवेशकों की कुल होल्डिंग बढ़ने के रूप में दिखता है। हालांकि बोनस के बाद शेयर की कीमत तकनीकी तौर पर एडजस्ट होती है, लेकिन लंबे समय में इसका मनोवैज्ञानिक असर सकारात्मक माना जाता है। इससे लिक्विडिटी बढ़ती है और शेयर छोटे निवेशकों के लिए भी ज्यादा आकर्षक बन जाता है।
ये भी पढ़े
आगे क्या रह सकता है खास?
GRM Overseas का ट्रैक रिकॉर्ड, मजबूत फंड जुटाने की रणनीति और बोनस जैसे फैसले इस शेयर को फिर से निवेशकों के रडार पर ले आए हैं। हालांकि शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और पिछला रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होता, लेकिन कंपनी के हालिया कदम यह जरूर दिखाते हैं कि मैनेजमेंट ग्रोथ को लेकर गंभीर है। लॉन्ग टर्म निवेशक इस स्टॉक पर नजर रख सकते हैं, खासकर वे लोग जो मल्टीबैगर शेयरों की तलाश में रहते हैं।
