भारत की नागरिक उड्डयन व्यवस्था को लेकर संसद में एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। लोकसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की प्रमुख एयरलाइनों के लगभग 50 फीसदी विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई है। इस खुलासे के बाद विमान सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। आंकड़ों में सबसे ज्यादा प्रभावित एयरलाइनों में इंडिगो और एयर इंडिया का नाम सामने आया है।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए बताया कि जनवरी 2024 से लेकर 3 फरवरी 2025 तक कुल छह अनुसूचित एयरलाइनों के 754 विमानों की जांच की गई। जांच के दौरान 377 विमान ऐसे पाए गए, जिनमें तकनीकी खराबियां बार-बार सामने आ रही थीं। यानी हर दूसरा विमान किसी न किसी तकनीकी समस्या से जूझ रहा है।
इंडिगो के विमानों में सबसे ज्यादा खामियां
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इंडिगो एयरलाइन के सबसे अधिक विमानों की जांच की गई और सबसे ज्यादा खराबियां भी इसी एयरलाइन में दर्ज की गईं। 3 फरवरी तक इंडिगो के 405 विमानों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 148 विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई। यह संख्या देश की किसी भी अन्य एयरलाइन की तुलना में सबसे अधिक है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो का बेड़ा देश में सबसे बड़ा है, लेकिन बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याएं एयरलाइन की मेंटेनेंस व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
एयर इंडिया की स्थिति और भी गंभीर
जहां इंडिगो के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, वहीं एयर इंडिया की स्थिति और ज्यादा गंभीर मानी जा रही है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कुल 267 विमानों की जांच की गई, जिनमें से 191 विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई। इसका मतलब यह है कि लगभग 72 फीसदी एयर इंडिया के विमान बार-बार समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एयर इंडिया के 166 विमानों में से 137 और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 विमानों में बार-बार तकनीकी गड़बड़ी दर्ज की गई।
अन्य एयरलाइनों की स्थिति
अन्य एयरलाइनों की बात करें तो स्पाइसजेट के 43 विमानों की जांच में 16 विमानों में बार-बार खराबी पाई गई, जबकि अकासा एयर के 32 विमानों में से 14 विमानों में तकनीकी खामियां सामने आईं।
एयर इंडिया ने दी सफाई
इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने एहतियात के तौर पर पूरे बेड़े की गहन जांच कराई, जिससे समस्याओं की संख्या ज्यादा दिखाई दे रही है। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अधिकांश खराबियां डी-कैटेगरी से जुड़ी हैं, जिनका सीधा संबंध विमान सुरक्षा से नहीं है। इनमें सीट, ट्रे टेबल, स्क्रीन और केबिन सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
DGCA ने बढ़ाई निगरानी
सरकार ने बताया कि DGCA ने निगरानी और निरीक्षण को और सख्त किया है। पिछले वर्ष नियोजित निगरानी के तहत 3,890 निरीक्षण, 56 नियामक ऑडिट और 492 रैंप निरीक्षण किए गए। इसके अलावा, 874 स्पॉट चेक और 550 नाइट इंस्पेक्शन भी किए गए।
