शिलांग : मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले से गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। जिले के दूरस्थ इलाके में स्थित एक अवैध कोयला खदान में हुए जोरदार विस्फोट में कम से कम 10 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी और भी मजदूर फंसे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। यह हादसा मयन्संगट थांगस्को क्षेत्र में हुआ, जहां अवैध तरीके से कोयले का खनन किया जा रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, खदान में काम के दौरान डायनामाइट विस्फोट हुआ, जिससे पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और वहां मौजूद मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
राहत और बचाव कार्य तेज, कई टीमें मौके पर तैनात
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। मौके पर बम निरोधक दस्ता, फोरेंसिक विशेषज्ञ, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और अग्निशमन सेवा की टीमें भेजी गईं। सभी एजेंसियां मिलकर मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने में जुटी हुई हैं। ईस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने पुष्टि की कि यह हादसा डायनामाइट विस्फोट के कारण हुआ। उन्होंने बताया कि अब तक खदान से चार शव निकाले जा चुके हैं, जबकि गंभीर रूप से झुलसे एक व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए शिलांग रेफर किया गया है।
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NGT के प्रतिबंध के बावजूद जारी अवैध खनन
यह हादसा मेघालय में अवैध कोयला खनन की गंभीर समस्या को एक बार फिर उजागर करता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने वर्ष 2014 में ‘रैट-होल’ कोयला खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि इसे अत्यंत खतरनाक और अवैज्ञानिक माना गया था। इसके बावजूद राज्य के कई इलाकों में अवैध खनन जारी है। मेघालय हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ब्रोजेंद्र प्रसाद काटाके भी पहले इस बात पर चिंता जता चुके हैं कि सरकारी दावों के बावजूद अवैध खनन और कोयले का परिवहन नहीं रुक पाया है।हालांकि, मुख्यमंत्री कोनराड संगमा का कहना है कि प्रशासन सतर्क है और अवैध खनन के खिलाफ 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में इस तरह का हादसा हुआ हो। इसी थांगस्को गांव में 23 दिसंबर 2020 को भी एक विस्फोट हुआ था, जिसमें दो खनिकों की मौत हो गई थी।
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सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
ताजा हादसे ने एक बार फिर अवैध खनन, मजदूरों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत एवं बचाव कार्य अभी जारी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
