- कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और बरेली जेल परिक्षेत्र में IPS की तैनाती
- विभागाध्यक्ष के साथ तीन परिक्षेत्र में IPS तैनात करने का हुआ था निर्णय
राकेश यादव
लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में शासन का निर्णय कोई मायने नहीं रखता है। यही वजह है कि आईपीएस के जेल परिक्षेत्र पर विभागीय और विभागीय डीआईजी के परिक्षेत्र पर IPS अधिकारी तैनात कर रखे गए हैं। लखनऊ परिक्षेत्र में आईपीएस के बजाए विभागीय डीआईजी और विभागीय जेल परिक्षेत्र में IPS DIG तैनात कर रखे गए हैं। यह मामला विभागीय अफसरों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि शासन की लापरवाही से जेल परिक्षेत्रों में व्यवस्थाएं अस्त व्यस्त हो गई हैं।
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मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2007 में प्रदेश की बसपा सरकार की मुखिया एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश के कारागार विभाग में आमूल चूल परिवर्तन का निर्णय लिया था। इस निर्णय के तहत आईएएस के स्थान पर कारागार विभाग में विभागाध्यक्ष की कमान आईपीएस के हाथों में सौंपी गई। इसके साथ ही प्रदेश के नौ जेल परिक्षेत्र में तीन परिक्षेत्र पर आईपीएस और अन्य पर विभागीय डीआईजी तैनात किए जाने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय के तहत कारागार विभाग में विभागाध्यक्ष की कमान तत्कालीन अपर महानिदेशक पुलिस सुलखान सिंह को सौंपी गई थी। इसके अलावा राजधानी लखनऊ, मेरठ और अयोध्या जेल परिक्षेत्र की कमान आईपीएस अधिकारियों को सौंपी गई थी। वर्तमान में शासन में बैठे आला अफसरों ने माया सरकार में बदली गई इस व्यवस्था को अस्त व्यस्त कर दिया है।
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सूत्र बताते है कि वर्तमान समय में आईपीएस की लखनऊ जेल परिक्षेत्र में विभागीय डीआईजी रामधनी और अयोध्या जेल परिक्षेत्र में विभागीय डीआईजी शैलेन्द्र मैत्रेय को तैनात कर रखा गया है। विभागीय डीआईजी पी एन पांडेय को आगरा परिक्षेत्र के साथ डीआईजी कारागार मुख्यालय का प्रभार दिया गया है। मेरठ परिक्षेत्र में आईपीएस सुभाष शाक्य को तैनात कर रखा गया है जबकि आईपीएस की लखनऊ और अयोध्या परिक्षेत्र में विभागीय डीआईजी तैनात कर रखे गए हैं।
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सूत्रों का कहना है कि विभागीय डीआईजी की प्रयागराज और वाराणसी जेल परिक्षेत्र में आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार श्रीवास्तव और कानपुर परिक्षेत्र में आईपीएस प्रदीप गुप्ता को तैनात कर रखा गया है। इसी प्रकार बरेली जेल परिक्षेत्र की जिम्मेदारी भी आईपीएस अधिकारी कुंतल किशोर को सौंपी गई हुई है। ऐसा तब कर रखा गया है जब शासन ने लखनऊ, अयोध्या और मेरठ परिक्षेत्र में आईपीएस और अन्य जेल परिक्षेत्रों में विभागीय डीआईजी तैनात किए जाने का निर्देश दिया था। वर्तमान समय में कारागार विभाग में विभागाध्यक्ष समेत पांच आईपीएस और तीन विभागीय डीआईजी तैनात हैं। इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।
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एक एक DIG को दो दो परिक्षेत्र की जिम्मेदारी
शासन में बैठे आला अफसरों ने कारागार मुख्यालय की व्यवस्था को ही ध्वस्त कर दिया है। पूर्व में लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी को ही DIG मुख्यालय का प्रभार सौंपा जाता रहा है। शासन ने इस बार आगरा परिक्षेत्र के डीआईजी को डीआईजी मुख्यालय का प्रभार सौंप कर नई परंपरा डाल दी है। लखनऊ में बैठकर करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर की आगरा परिक्षेत्र की जेलों का निरीक्षण कर पाना आसान नहीं है। इसी प्रकार आईपीएस राजेश कुमार श्रीवास्तव को प्रयागराज के साथ वाराणसी जेल परिक्षेत्र का प्रभार सौंप रखा गया है। मेरठ परिक्षेत्र का प्रभार संभाल रहे आईपीएस सुभाष चंद्र शाक्य को कारागार मुख्यालय का भी प्रभार दिया गया है। वर्तमान समय में डीआईजी मेरठ परिक्षेत्र, कानपुर परिक्षेत्र और लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी का कार्यालय मुख्यालय में ही है। इसके साथ ही आगरा परिक्षेत्र के पास डीआईजी मुख्यालय का प्रभार होने की वजह से वह भी पांच दिन मुख्यालय में ही बैठते हैं। वर्तमान समय में चार डीआईजी कारागार मुख्यालय में बैठकर परिक्षेत्र के साथ मुख्यालय के भी काम निपटा रहे हैं।
