सोमनाथ की धरती एक बार फिर इतिहास, श्रद्धा और राष्ट्रगौरव की साक्षी बनी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित शौर्य यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा उस अमर आस्था का प्रतीक है, जिसने 1026 के आक्रमण के बाद भी सोमनाथ मंदिर को टूटने नहीं दिया, बल्कि हर बार पहले से अधिक सशक्त होकर खड़ा किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर परिसर में विधिविधान से पूजा की और डमरू बजाकर शिवभक्ति और सनातन परंपरा का संदेश दिया। यह दृश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन गया। 108 घोड़ों के साथ निकली शौर्य यात्रा ने वीरता, परंपरा और अनुशासन का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।गुजरात पुलिस की माउंटेड यूनिट के इन विशेष घोड़ों को महीनों तक प्रशिक्षण दिया गया था। उनकी सधी हुई चाल और अनुशासन ने यात्रा को भव्यता प्रदान की। प्रधानमंत्री फूलों से सजे वाहन में खड़े होकर लोगों का अभिवादन करते दिखे। पूरे मार्ग में “हर-हर महादेव” और “भारत माता की जय” के जयघोष गूंजते रहे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया, जिनके प्रयासों से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हो सका। उन्होंने उन अनाम वीरों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आस्था की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।
शौर्य यात्रा में शामिल संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने शंख और डमरू वादन से आध्यात्मिक वातावरण रच दिया। बच्चों, साधु-संतों और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस आयोजन को जन-जन से जोड़ दिया।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यह संदेश देता है कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने इस पर्व को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का उत्सव बना दिया।
