नया लुक ब्यूरो
रांची/दुमका। झारखंड के दुमका में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक विचलित करने वाली वारदात के आज दूसरे दिन थाना इंचार्ज ताराचंद को आज एसपी ने, विभागीय जांचोपरांत, सस्पेंड कर दिया। जबकि जिले के पत्रकार इस दारोगा को बर्खास्त कर जेल भेजने की मांग कर रहे हैं।
मंत्री के कार्यक्रम से लौट रहे पत्रकारों के साथ मारपीट
ये घटना दुमका जिले के हंसडीहा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक दो अलग-अलग निजी चैनल के वरिष्ठ पत्रकार मृत्युंजय पांडेय और पत्रकार नितेश वर्मा मंत्री संजय प्रसाद यादव के कार्यक्रम से लौट रहे थे। हंसडीहा चौक पर भीषण जाम लगा था। जब पत्रकारों ने जाम की वजह जानने की कोशिश की, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की, गाली गलौच और पिटाई शुरू कर दी।
पत्रकारों ने लगाया मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप
पीड़ित पत्रकारों का आरोप है कि अपना परिचय देने के बावजूद हंसडीहा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। हद तो तब हो गई जब उन्हें जबरन थाने ले जाकर घंटों बंधक बनाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
घटना के बाद जिले के पत्रकारों और स्थानीय जनता में भारी आक्रोश
मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन थानों की फोर्स और जरमुंडी डीएसपी मौके पर पहुंचे। एसपी पीतांबर सिंह खेरवार के हस्तक्षेप के बाद पत्रकारों को मुक्त कराया गया। इस घटना से जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। दारोगा के सस्पेंशन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग शुरू हुई और पत्रकारों के साथ साथ आम जनता भी मात्र सस्पेंशन की कार्रवाई से असंतुष्ट दिख रही है। सभी एक स्वर से दारोगा को बर्खास्त कर जेल भेजने की सोशल मीडिया पर मांग कर रहे हैं।
