- NDPS के आरोपी को सुनाई जानी थी सज़ा पर चूहों ने पलट दिया गेम,
- तस्करी का यह 200 किलो गांजा था सबूत,
- कोर्ट ने तस्कर को किया बरी,
- शराबी के बाद पुलिस अब चूहों को बना रही गंजेड़ी,
रंजन कुमार सिंह
रांची। मयकश चूहे अब मारिजुआना यानि गांजा का आनंद ले रहे हैं। शाम का धुंधलका छाते, चोरी छुपे शराब की चुस्कियां लेने वाले चूहों की अगली पीढ़ी अब मारिजुआना के कश आजमा रही है, और चूहों की यह रंगरेलियां बेधड़क थाने में चल रही हैं। ओरमांझी थाना में जब्त 200 किलो गांजा की गुमशुदगी के बाबत कुछ ऐसा ही वाकया सामने आया है। नतीजतन कथित तौर पर चूहों द्वारा खा लिए जाने से एनडीपीएस केस कमजोर पड़ गया और सबूत पेश न कर पाने के चलते अदालत ने आरोपी इंद्रजीत राय को बाइज्जत बरी कर दिया। ये बात दीगर है कि इस अविश्वसनीय मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
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जानकारी के मुताबिक 200 किलोग्राम गांजे की बाजार में कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है। कहा यह भी जा रहा है कि आरोपी की मदद करने के लिए पुलिस ने जानबूझकर सबूत पेश नहीं किया और मुफ़्त में चूहों को बदनाम किया। यह गांजा झारखंड की राजधानी रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में जब्त किया गया था। मामला बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले इंद्रजीत राय उर्फ अनुरजीत राय से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने गांजे की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। जनवरी 2022 में ओरमांझी थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की चार पहिया गाड़ी में भारी मात्रा में मादक पदार्थ ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने वाहन चेकिंग अभियान शुरू किया। इसी दौरान रांची से रामगढ़ की ओर जा रही एक सफेद बोलेरो कार को रोका गया। पुलिस को देखते ही वाहन में सवार अन्य लोग मौके से फरार हो गए, जबकि एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ लिया। उसकी पहचान बिहार के वैशाली जिले के इंद्रजीत राय उर्फ अनुरजीत राय के रूप में हुई।
200 किलो गांजा बरामद हुआ था
पुलिस ने बोलेरो से करीब 200 किलो गांजा बरामद किया गया। इसके बाद एनडीपीएस एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया। अनुसंधान के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और आरोपी पर आरोप भी तय किए। जब मामला अदालत में साक्ष्य के स्टेज पर पहुंचा तो पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस न तो जब्त गांजा प्रस्तुत कर सकी और न ही ठोस साक्ष्य पेश कर पाई। गवाहों के बयान और पुलिस रिकॉर्ड में भी कई विरोधाभास सामने आए।
200 किलो गांजा चूहे खा गए
सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब अदालत को बताया गया कि ओरमांझी थाना के मालखाने में पुलिस निगरानी में रखा गया करीब 200 किलो गांजा चूहों द्वारा खा लिया गया है। पुलिस ने इस संबंध में वर्ष 2024 में एक सनहा दर्ज होने की बात भी अदालत को बताई, मतलब गांजा खा पी जाने के आरोप में चूहों के विरुद्ध बजाप्ता सनहा दर्ज किया गया। लेकिन अदालत ने इसे सबूतों की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही माना। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जब्त मादक पदार्थों की सुरक्षा पुलिस की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में सबूतों के नष्ट हो जाने से पूरे मामले की जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। इसी आधार पर अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के आरोपी इंद्रजीत राय उर्फ अनुरजीत राय को बरी कर दिया।
पुलिस निगरानी में ऐसे कैसे हुआ?
इस फैसले के बाद कई अहम सवाल उठने लगे हैं। आखिर पुलिस निगरानी में रखा गया गांजा की इतनी बड़ी मात्रा आखिर चूहे कैसे खा गए? क्या थानों के मालखानों में जब्त मादक पदार्थों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं? या फिर इस दावे के पीछे कुछ और सच्चाई छिपी है। इस घटना ने झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह भी बहस छिड़ गई है कि करोड़ों रुपये के जब्त मादक पदार्थों की निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी आखिर किस स्तर पर निभाई जा रही है। फिलहाल यह मामला सिस्टम की लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा असर डाला है। सनद रहे कि गत वर्ष पटना के गांधी मैदान थाने में जब्त कर के रखे गए 500 बोतल शराब, कोर्ट में बतौर सबूत ले जाए जाने के समय गायब पाए गए थे। पुलिस ने कोर्ट में कह दिया कि चूहे पी गए।
