विजय श्रीवास्तव
बढनी/लखनऊ। सिद्धार्थनगर जिले के बढनी विकास खंड अंतर्गत ढेकहरी बुजुर्ग गांव में मतदाता सूची से 107 नामों के कटने का मामला गंभीर विवाद का कारण बन गया है। ग्राम स्तर पर मतदाता सूची तैयार करने के जिम्मेदार बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ या BLO) पर पक्षपातपूर्ण तरीके से नाम काटने का आरोप लगा है। पीड़ित ग्रामीणों का दावा है कि यह कार्रवाई किसी प्रधान प्रत्याशी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से की गई, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना पर चोट पहुंची है।

24 दिसंबर को परिवर्धन सूची प्रकाशित होने के बाद प्रभावित मतदाताओं ने तहसील, ब्लॉक कार्यालय, बीएलओ और सुपरवाइजर के चक्कर काटे, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। निराश ग्रामीणों ने मीडिया से संपर्क किया, जिसके बाद स्थानीय अखबारों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। अब गांववासी नाम वापस जुड़वाने के लिए सामूहिक प्रयास कर रहे हैं और चंदा इकट्ठा कर जिला जज के समक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 218/167 के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में जुटे हैं। यह धाराएं लोक सेवक द्वारा जानबूझकर गलत दस्तावेज तैयार करने या रिकॉर्ड में हेरफेर करने को संगीन अपराध मानती हैं, जिसमें तीन वर्ष तक की कैद या जुर्माना या दोनों दंड का प्रावधान है। विशेष रूप से, यदि यह हेरफेर किसी को कानूनी सजा से बचाने या किसी को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया गया हो, तो यह दंडनीय है।

ग्रामीणों ने बताया कि यह बीएलओ पहले भी विवादित रहा है। जनवरी 2025 में बनचौरी गांव में भी इसी व्यक्ति ने पक्षपातपूर्ण वोटर लिस्ट तैयार की थी, जिसकी शिकायत अवधेश कुमार (मो. 09565093482) ने जिलाधिकारी से की थी। उस समय डीएम ने जांच समिति गठित की थी। अब गांव के भानू चौधरी सहित अन्य लोगों ने डीएम को पत्र लिखकर इस विवादित अधिकारी को तत्काल हटाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे पक्षपाती कार्यों से ग्राम पंचायत चुनावों में अक्सर विवाद और दुश्मनी बढ़ जाती है, जो गांव में शांति, निष्पक्षता और भाईचारे के लिए हानिकारक है। वे चाहते हैं कि जांच हो और दोषी पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में मतदाता अधिकारों का हनन न हो। यह घटना चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
